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Thursday, 29 September 2016

पी ओ के अपनी धरा, धरो मगज में बात-

पी ओ के की गन्दगी, सैनिक रहे हटाय।
इसी स्वच्छता मिशन से, पाक साफ हो जाय।।

पी ओ के अपनी धरा, धरो मगज में बात।
आते जाते हम रहें, दिन हो चाहे रात।।



चौड़ी छाती हो गयी, रविकर छप्पन इंच।
धूर्त मीडिया को करे, वार-सर्जिकल पिंच।
वार सर्जिकल पिंच, रखैलें बरखा दत्ती।
रही खोजती लोच, जला के दिन में बत्ती।
ह्युमेन राइट आज, करेगा हरकत भौंड़ी।
भड़ुवे करें विलाप, भक्त खा रहे कचौड़ी।।



मना मुहर्रम उरी में, धुरी चुकी है घूम।
मची पाक में खलबली, दीवाली की धूम।
दीवाली की धूम, बूम बुम बम बम बारी।
परेशान था देश, किन्तु करके तैयारी।
देते धावा बोल, पूर्ण कर रहे कामना।
करो ठीक भूगोल, तिरंगा उच्च थामना।।

Sunday, 25 September 2016

दाता अपने नाम, भेजते रहिए डाटा-


डाटा जैसे अॉन हो, हे दाता भगवान।
प्राप्त परमगति झट करे, यह मूरख इंसान।
यह मूरख इंसान, ध्यान योगासन रोजा।
भूले धर्म विभेद, खुदा डाटा में खोजा।
परिजन स्वजन बिसार, चाहता है सन्नाटा।
दाता अपने नाम, भेजते रहिए डाटा।।

Thursday, 22 September 2016

अपराध ये करता रहा

हो सर्व-व्यापी किन्तु मैं तो खोजता-फिरता रहा।
तुम शब्द से भी हो परे पर नाम मैं धरता रहा ।
हो सर्व ज्ञाता किन्तु इच्छा मैं प्रकट करता रहा।
अपराध ये करता रहा पर कष्ट तू हरता रहा।।

Monday, 19 September 2016

माँ कालिका

दुर्मुख असुर दारुण दुखों से साधु मन छलने लगा।
वरदान पा कर दुष्ट आ कर विश्व को दलने लगा।
ब्रहमा वरुण यम विष्णु व्याकुल इंद्र को खलने लगा।
सुर साधु बल-पौरुष घटा विश्वास जब ढलने लगा।

तब हो इकट्ठा देवता कैलास पर्वत पर गये।
गौरा विराजे रूप छाजे सर्व आनंदित भये।
बोले सकल सुर एक सुर मे कर कृपा जगदम्बिके।
दुर्मुख असुर संहार कर दीजै अभय माँ कालिके।

सुन कर विनय निर्णय करे माँ रूप मारक धर रही।
एकांश शिव मुख मे गया विषपान मैया कर रही।
आकार सम्यक रंग काला कंठ में शिव के बने।
तब तीसरा शिव नेत्र खोलें युद्ध अति-भीषण ठने।

माँ कालिके के माथ पर भी नेत्र शिव सम तीसरा।
शुभ चंद्र रेखा भाल पर विष शिव कराली था भरा।
धारे विविध आभूषणों को अस्त्र-शस्त्रों को लिए।
क्रोधित भयंकर रूप धारे रक्त खप्पर में पिए।।

यह देख कुल सुर-सिद्ध भागे कालिके हुंकार दे।
हुंकार से दुर्मुख मरे कुल दैत्य माँ संहार दे।
पर क्रोध बढ़ता देखकर सुर साधुजन घबरा गये।
तब रूप शिशु का धार कर पैरों तले शिव आ गये।

ममतामयी माँ ले उठा शिशु को पिलाती दुग्ध है।
यह दृश्य पावन देख कर नश्वर-जगत भी मुग्ध है।
शिव दुग्ध के ही साथ मॉ का क्रोध सारा पी गये।
माँ कालिका मूर्छित हुई शिव नृत्य फिर करते भये।

तांडव-भयंकर हो शुरू चैतन्य हो माँ कालिके ।
खुद मुंडमाला डालकर तांडव करे चंडालिके।
मॉ योगिनी मॉ कालिके कुल कष्ट भक्तों का हरो।
इस देश रविकर ग्राम पर कुल पर कृपा माता करो।