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Sunday, 11 December 2016

जय गणेशा

जय जय गजानन जय गणेशा विघ्नहर्ता आइये।
शुभ सूंढ़ क्यूं टेढ़ी हुई हर भक्त को बतलाइये।
कैसे विराजे दीर्घकाया मूस पर समझाइये।
जय जय गजानन जय गणेशा विघ्नहर्ता आइये।।
ब्रह्माँड मे गणपति सदा पाते रहे पूजा प्रथम।
लम्बा उदर इक दाँत टूटा स्वागतम् प्रभु स्वागतम्।
शुभ लाभ विद्या बुद्धि के दाता दया दिखलाइये।
जय जय गजानन जय गणेशा विघ्नहर्ता आइये।
हों रिद्धि दायें सिद्धि बायें मोहिनी छवि दो दिखा।
दुर्भाग्य काटो भक्त के यदि माथ पर रविकर लिखा।
फिर मोदकम् जम्बू फलम् उदरस्थ करके जाइये।
जय जय गजानन जय गणेशा विघ्नहर्ता आइये।

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