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Wednesday, 18 July 2012

मन मंदिर मोहित मगन, मुश्किल में मम देह-रविकर

धीरे धीरे सावन आये। समय हमेशा अधिक लगाये ।
व्याकुल जीवन तपती धरती । नाजुक विटप लताएँ मरती ।।

कुदरत अब सिंगार करे है । मस्तक पर नव मुकुट धरे है ।
नव पल्लव संबल पाते हैं । लिपट चिपट कर चढ़ जाते हैं ।।

हरियाली सब का मन मोहे ।  रविकर दिनभर भटके-टोहे ।
मेघ गर्जना बिजली दमकी । कविवर क्यूँ आँखें न चमकी ??

देवता मिल गया....

Dr (Miss) Sharad Singh at Sharad Singh

मिलता मंदिर में मुझे, मन-मंदिर मनमीत |
ध्यान आरती में कहाँ, मैं तो गाऊं गीत |

मैं तो गाऊं गीत, सजन को जरा बुला लो |
कर दे नेह विदेह, सँभालो देखो-भालो।

पूरे सोलह सोम, शिवा का आसन हिलता |
हुई हुलसती होम, मीत मन-मंदिर मिलता || 

ये बेरुखी कब तक होगी.

आमिर दुबई
मोहब्बत नामा  
छोड़कर चलते बने तुम, किस ठिकाने पर टिकोगी |
गम बेंचता आऊं उधर ही, दे गए जो मुझे मन भर  |

दाल रोटी लूँ कमा मैं , याद में तेरी मरुँ न --
पाव भर बेचूं तुझे भी,  चख के करना याद रविकर ||

खुद का खुद से नाता तोड़ता !!!

सदा
SADA  

टूट-फूट को जोड़ते, लगा गाँठ पर गाँठ ।
रहा अनवरत कर्मरत, पहर आठ के आठ  |

पहर आठ के आठ,  पाठ धीरज का पढ़ के ।
नेह बांध के साथ, निभाये वह बढ़-चढ़ के ।

सबसे आगे दौड़, छोड़ता पीछे सबको ।
खुद से नाता तोड़, याद कर जाए रब को ।।

सपनों का सौदागर


मन-भावन सपने सजे, मजे दार हैं मित्र ।
वैसे तो अनमोल हैं, लेकिन बात विचित्र ।

लेकिन बात विचित्र,  मुफ्त बांटे सौदागर ।
तरह तरह के भेद, छाँट लो बढ़िया सादर ।

दिवास्वप्न हैं व्यर्थ, बिछाओ प्रेम-विछावन ।
ले लो गहरी नींद, देख सपने मनभावन ।।

12 comments:

  1. बहुत बढिया प्रस्तुति!

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  2. sundar links se saji sundar prastuti..

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  3. Replies
    1. लाजवाब लिखते हैं जनाब रविकर !!

      टूट-फूट को जोड़ते, लगा गाँठ पर गाँठ ।
      रहा अनवरत कर्मरत, पहर आठ के आठ |

      दिल दिख रहा है आज
      दिनेश की दिल्लगी में
      वो भी दो पीस में
      टूट फूट है जोड़ है
      फेविकोल है और है गाँठ !!

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  4. शहनाई सी बाज, आज की गजब आरती ।
    मनमोहक अंदाज, स्वयं से खड़ी हारती ।

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  5. शहनाई सी बाज, आज की गजब आरती ।
    मनमोहक अंदाज, स्वयं से खड़ी हारती ।
    बड़े फलक की बेहतरीन प्रस्तुति .

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  6. सुन्दर छन्दों से रहे, रविकर जी टिपियाय।
    पाकर मोहक कुण्डली, पोस्ट धन्य हो जाय।।

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  7. दिनेश जी की दिल्लगी हर किसी को भाय ,
    पढने को पाठक यहाँ दौड़ा आता जाये.
    दिल्लगी तो नाम है बस दिल को छु जाएगी ,
    इनकी बातें आपके के भी दिल को भा जाएगी.



    मोहब्बत नामा
    मास्टर्स टेक टिप्स

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  8. लाजवाब संकलन है, दिनेश जी आपका।

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