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Sunday, 5 February 2017

नारि भूप गुरु अग्नि के, रह मत अधिक करीब-

 नारि भूप गुरु अग्नि के, रह मत अधिक करीब।
रहमत की कर आरजू, जहमत लिखे नसीब।।

सर्प व्याघ्र बालक सुअर, भूप मूर्ख पर-श्वान।
नहीं जगाओ नींद से, खा सकते ये जान।।

कठिन समस्या के मिलें, समाधान आसान।
परामर्शदाता शकुनि, किंवा कृष्ण महान।।

शिल्पी-कृत बुत पूज्य हैं, स्वार्थी प्रभु-कृत मूर्ति।
शिल्पी-कृत करती दिखे, स्वार्थों की क्षतिपूर्ति।

गारी चिंगारी गजब, दे जियरा सुलगाय।
गा री गोरी गीत तू , गम गुस्सा गुम जाय।।

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