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Thursday, 20 March 2014

जाति-धर्म पर वोट, बुद्धि-बल हवा-हवाई

हवा हवाई योजना, हवा हवाई बात |
भूला सारी मुश्किलें, यह मानुष बदजात |

यह मानुष बदजात, चुनावी बेला आई |
भूला भ्रष्टाचार, भूल बैठा मँहगाई |

हुआ नशे में चूर, कुँआ देखे ना खाईं | 
जाति-धर्म पर वोट, बुद्धि-बल हवा-हवाई ||

12 comments:

  1. बहुत सुंदर प्रस्तुति.
    इस पोस्ट की चर्चा, शनिवार, दिनांक :- 22/03/2014 को "दर्द की बस्ती":चर्चा मंच:चर्चा अंक:1559 पर.

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  2. बहुत सुन्दर और सटीक रचना !
    latest post कि आज होली है !

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  3. बहुत सुन्दर रचना ..

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  4. सुन्दर और सटीक रचना !

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  5. जाति धर्म पे वोट

    बुद्धि पर हवा हवाई !

    सटीक व्यंग्य विडम्बन

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  6. '....बुद्धि-बल हवा-हवाई.'
    कहते-कहते गला सूख जाएगा रविकर जी , ..यहाँ कहाँ कोई सुननेवाला :सभी तो अक्ल के पीछे लट्ठ लेकर भाग रहे हैं !

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