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Tuesday, 7 October 2014

जीवन का वरदान, मातु की पहली कक्षा-

जिम्मेदारी   के   लिए,  हो   जाओ  तैयार,   

बच्चों के प्रति है अगर, थोडा सा भी प्यार |

थोडा सा भी प्यार,  बड़े विश्वास जगाओ--
सबसे पहले स्वयं,  नियम- संयम अपनाओ |
करो सदा सद्कर्म,  बाल-बाला आभारी |
नैतिक शिक्षा आज, हमारी जिम्मेदारी ||

स्नेहमयी  स्पर्श  की, अपनी  इक  पहिचान,  
बुरी-नियत संपर्क का, चलो  दिलाते  ध्यान |
चलो  दिलाते  ध्यान, बताना   बहुत  जरुरी,
दिखे  भेड़  की  खाल, बना  के  रक्खे  दूरी |
करो   परीक्षण  स्वयं, बताओ सीधा रस्ता,
घर  आये   चुपचाप,  उठा के अपना बस्ता ||

पहली  कक्षा  में  सिखा, सेहत  के  सब  राज,
और  आठवीं  में  बता ,  सब  अंगों  के  काज |
सब  अंगों  के  काज,  मगर   विश्वास  जरुरी,
धीरे - धीरे    शांत,  करो     जिज्ञासा    पूरी |
खतरे - रोग - निदान,  बताकर करिये रक्षा । 
जीवन का वरदान, मातु की पहली कक्षा ||

बच्चा मन चंचल बड़ा, दिखे ओर ना छोर । 
हलकी  सी   बहती   हवा,   आग   लगाए   घोर |
आग    लगाए     घोर,   बचाना    चिंगारी    से,
पढना  लिखना  खेल,  सिखाओ  हुशियारी  से |
कह  रविकर  समझाए,  अगर  पढने  में  कच्चा,
रखिये   ज्यादा  ध्यान,  बिगड़  जाये  न  बच्चा ||


बच्चों को भी हो पता,  होवेगा  कब  व्याह,
रोजगार से लग चुका,  तब भी भरता आह |
तब भी भरता आह,   हुवा वो  पैंतिस  साला--
बढ़  जाते  हैं  चांस,  करे  न  मुँह  को काला |
सही समय पर व्याह,  कराओ  उसका  भाई,
इधर-उधर  हर-रोज  करे  न  कहीं  सगाई  ||

4 comments:

  1. वाह...।
    आप प्रतिभावान है।
    आपको तो बालसाहित्य में लेखनी चलानी चाहिए मित्र।

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  2. बहुत सुंदर

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  3. कह रविकर समझाए, अगर पढने में कच्चा,
    रखिये ज्यादा ध्यान, बिगड़ जाये न बच्चा ||
    सहीं कहां आपने
    http://savanxxx.blogspot.in

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