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Tuesday, 15 March 2016

इन सब से वे ठीक, बने जो आधे-पौने -

राम-भरोसे चल पड़े, फैलाने सुविचार । 
धर्म-विरोधी ले उठा, हाथों में हथियार ।

हाथों में हथियार, कर्म तो गजब-घिनौने । 
इन सब से वे ठीक, बने जो आधे-पौने । 

धर्म न्याय विज्ञान, भूमि भी इनको कोसे । 
दुनिया यह तूफ़ान, झेलती राम-भरोसे ॥ 

3 comments:

  1. सुन्दर व सार्थक रचना प्रस्तुतिकरण के लिए आभार!

    मेरे ब्लॉग की नई पोस्ट पर आपका स्वागत है...

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  2. बहुत बढ़िया ....

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  3. रविकर जी आपकी इस रचना के लिए आपको बहुर बहुत बधाई ......आपकी यह रचना अत्यंत भावपूर्ण व विचारों से युक्त है......आप अपनी ऐसी ही रचनाओं को शब्दनगरी के माध्यम से भी प्रकाशित कर सकतें हैं..........

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