Follow by Email

Wednesday, 29 June 2016

मुसीबत खड़ी सामने हो कभी

मुसीबत खड़ी सामने हो कभी,
कौन जाता वहाँ से यही देखिये |

बड़ा मतलबी है हमारा शहर 
कौन रुकता वहाँ पर नहीं देखिये |

डटो सामने तुम करो सामना 
जो साधन वहाँ पर वही देखिये |

मिलेगी विजय और पहचान होगी 
गलत देखिये कुछ सही देखिये ||

2 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (01-07-2016) को "आदमी का चमत्कार" (चर्चा अंक-2390) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    ReplyDelete