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Sunday, 9 October 2011

काम काम काम काम

कामकाज  में  लीन  है,  सुध  अपनी विसराय |
उत्तम प्राकृत मनुज  की,  ईश्वर  सदा  सहाय ||

The surgical instrument manufacturing industry of Sialkot in Pakistan  कामगार की जिन्दगी, खटता  बिन तकरार |
थोथे  में   ढूंढे  ख़ुशी,  मालिक  का  आभार || 
    Lazy Man Laying on a Couch
कामचोर  कायल  करे,   कहीं   कायली  नाँय |
दूजे के श्रम पर  जिए,  सोय-सोय मर जाय ||   
File:Pisanello 010.jpg 

निकृष्ट   जीवन   मानिए,  जो  होते  कामांध |
डूबे  और  डुबाय   दें,   ज्यों  टूटे  तट-बाँध  ||
Various fish drawings - GraphicRiver Item for Sale
कामध्वज  की  जिन्दगी,  त्याग नीर का नेह |
क्षुधित जगत पर मर मिटे, पर-हित  धारी  देह ||
File:Italienischer Maler des 17. Jahrhunderts 001.jpg
पेटू   कामाशन   चहे,  कामतरू   के   तीर |  
भोजन  के  ही  वास्ते,  धारा   तोंद - शरीर || 

15 comments:

  1. बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

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  2. निकृष्ट जीवन मानिए, जो होते कामांध |
    डूबे और डुबाय दें, ज्यों टूटे तट-बाँध ||


    कामध्वज की जिन्दगी, पर-हित धारी देह |
    क्षुधित जगत के पेट हित, त्याग नीर का नेह ||
    behtarin prastuti...

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  3. रोचक और शानदार प्रस्तुति ...

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  4. पहले चित्तर ढूंढकर, दोहा लियो बनाय
    या गूगल में सर्च कर,चित्तर दियो सजाय!

    ...कहो कविवर/रविकर कैसी रही?

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  5. प्रिय रविकर जी हर श्रेणी को आप ने दर्शा दिया आनंद आ गया सच में कर्म की महत्ता और गुणवत्ता का कोई जबाब नहीं बहता झरना और नदिया .....
    भ्रमर ५

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  6. रोचक और बहुत लाजवाब प्रस्तुति ...

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  7. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी की गई है! आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  8. बहुत खूब रविकर जी क्या बात है ! रोचक और शानदार दोहे ....
    रोचक और बहुत लाजवाब प्रस्तुति

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  9. खूबसूरत अंदाज़ !अभिनव प्रयोग .बधाई .नए अंदाज़ के नीतिपरक व्यंग्य बाण .

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  10. इन दोहों में विलग मिला , रविकर का अंदाज
    किस चलनी में छाँट दिया ? कर्म, काम और काज.

    जब रविकर हो जात है , धीर, वीर , गम्भीर
    कलम - धनुष से नीकरै , भीष्म सरीखे तीर.

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  11. रविकर जी आपका बहुत- बहुत आभार मेरे १००वे फोलोवर के रूप में आपका बहुत स्वागत है, मैं आपकी ह्रदय से आभारी हूँ...
    रोचक और बहुत लाजवाब प्रस्तुति ...

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  12. भोजन के ही वास्ते धरा तोंद शरीर ..
    बहुत अच्छा प्रयोग है।

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  13. सुन्दर तस्वीरों के साथ शानदार प्रस्तुती!

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  14. दिनेश भाई बहुत खूब .टिपण्णी भी गज़ब की की है आपने शान्ति भूषण प्रसंग पर शुक्रिया .

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  15. मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/
    http://seawave-babli.blogspot.com

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