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Friday, 2 March 2012

मनोजात अज्ञान, मने मनुजा की माया-


भाया ओज मनोज का, उल्लू कहती रोज ।
सम्मुख माने क्यूँ भला,  देती रहती डोज ।
देती रहती डोज, खोज कर मौके लाती ।
करूँ कर्म मैं सोझ, मगर हरदम नखराती ।
मनोजात अज्ञान, मने मनुजा की माया ।
चौबिस घंटे ध्यान, मगर न मुंह को भाया ।।



हँसी ख़ुशी से कर रही, वर्षों से मनुहार ।
मुखड़े पर मुस्कान की, है कबसे दरकार ।
है कबसे दरकार, उदासी तन्हाई है ।
सदा जोहता बाट, संदेशा पहुंचाई है ।
सुन रे ऐ नादान, ख़ुशी जमकर इतराती ।
जहाँ रहे मुस्कान, वहाँ मैं पहले आती ।। 
जोखू ने जोखा सही, यही है भैया रीत ।
पीढ़ी दर पीढ़ी बनत, भरत-जनों की मीत ।
भरत-जनों की मीत, ढीठ *दिग्गीश्वर जैसा ।*इंद्र 
माँ को एकै रोग, ठिकाने जमता पैसा ।
   द्रव्य सदी से सोख, चले देने फिर धोखा।
जमा बाप का माल, सही जोखू ने जोखा ।।


कंधे कुल्हाड़ी रखे, चला कृषक अनजान ।
सूरज की छाया मिले, चन्दा पथ की शान ।
चन्दा पथ की शान, हरे पत्ते फल लाली ।
यह नीला आकाश, काम के बने सवाली ।
हल की पकड़ी मूठ, चला गहरे वो गहरे ।
गन की गोली झूठ, लगा चाहे सौ पहरे ।।

  बस्तर की अभिव्यक्ति -जैसे कोई

नहीं कालिया-डाह था, गया जगह था छोड़ ।
रीढ़-विहीनों में लगी, रही तभी से होड़ ।
 रही तभी से होड़, छुपा कर रक्खा फन को ।
मिलें आज हर मोड़,  करें त्रस्त सज्जन गन को
तीन फनी यह सर्प, भूल से आया सम्मुख ।
भगा देखकर दर्प, दुर्जनों के दो सौ मुख ।।


  उच्चारण

शास्त्री जी की पोस्ट है, पाठक बेहद ख़ास ।

क्रम-संख्या सुनिए जरा, बारह सौ पच्चास ।

बारह सौ पच्चास, गुरु है बारहबानी ।

बारहमासी रास, नहीं है कोई सानी ।

लगा चुके हैं आप, आज पच्चीस पचासा ।

इन्तजार है पाक, करें हम सौ की आशा  ।।


और अंत में --

  महेन्द्र श्रीवास्तव  
 आधा सच..

चालिसवाँ मन भर गया, मन भर मने चुनाव ।
नगर-नगर भटका किये, घूम हजारों गाँव ।
घूम हजारों गाँव, खबर राहुल की बढ़िया ।
एस पी खेली दाँव, पकेगी सत्ता-हड़िया ।
भाजप फूंके छाछ, गाछ से बसपा नीचे ।
राज न जाना राज, अजित हैं आँखे मीचे ।। 

आगरा मे चौपाल के दौरान समय मिला तो मैं और संदीप पहुंच गए ताजमहल...

होली है होलो हुलस, हाजिर हफ्ता-हाट ।
चर्चित चर्चा-मंच पर, रविकर जोहे बाट ।

5 comments:

  1. काव्य स्रजन का आपका नज़रिया बहुत बढ़िया लगा!

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  2. होली सब शिकवे गिले,भूले सभी मलाल!
    होली पर हम सब मिले खेले खूब गुलाल!!

    प्रस्तुती करने का बेहतरीन नजरिया,....

    NEW POST...फिर से आई होली...

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  3. anand aa gaya...holi ke rangon see bibidhata..sadar badhayee aaur amantran ke sath

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  4. शायद आपकी इस प्रविष्टी की चर्चाआज बुधवार के चर्चा मंच पर भी हो!
    सूचनार्थ

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