Follow by Email

Thursday, 9 January 2014

बहना बह ना भाव में, हवा बहे प्रतिकूल-





बहना बह ना भाव में, हवा बहे प्रतिकूल |

दिग्गज अपने दाँव में, दिखे झोंकते धूल |


दिखे झोंकते धूल, आँख में भरकर पानी |
तोड़े कई उसूल, किये अब तक मनमानी |

ले राहुल आलम्ब, सदा सत्ता में रहना |
दिखलाते नित दम्भ, संभलना छोटी बहना -

09 DECEMBER, 2013

सबको माने चोर, समर्थन ले ना दे ना -

कुंडलियां 

लेना देना जब नहीं, करे तंत्र को बांस |
लोकसभा में आप की, मानो सीट पचास |

मानो सीट पचास,  इलेक्शन होय दुबारे |
करके अरबों नाश, आम पब्लिक को मारे |

अड़ियल टट्टू आप, अकेले नैया खेना |
सबको माने चोर, समर्थन ले ना दे ना ||

रैन बसेरे में बसे, मिले नहीं पर आप |
आम मिला इमली मिली, रहे अभी तक काँप |

रहे अभी तक काँप, रात थी बड़ी भयानक |
होते वायदे झूठ, गलत लिख गया कथानक |

पड़े शीत की मार, आप ही मालिक मेरे  |
तनिक दीजिये ध्यान, सुधारें रैन बसेरे ||



मोहग्रस्त नारद बनाम बन्दर मीडियाPAWAN VIJAY 
'दि वेस्टर्न विंड' (pachhua pawan)

चले रिपोर्टिंग छोड़कर, पॉलिटिक्स के द्वार |
आशुतोष संतोष बिन, सम्भावना अपार | 

सम्भावना अपार, आप आपे से बाहर |
आपा बढ़ता जाय, कहाँ अब मोदी घर घर |

चाहे डूबे देश, आप की खातिर वोटिंग |
जुटा मीडिया देख, रात दिन चले रिपोर्टिंग ||

रविकर लंगड़ी मार, ख़िलाड़ी नहीं गिराओ -

कुछ पॉलिटिकल  
(१)
आओ जब मैदान में, समझ बूझ हालात |
मजे मजे मजमा जमे, जमघट जबर जमात |

जमघट जबर जमात, आप करिये तैयारी |
क़ाबलियत कर सिद्ध,  निभाओ जिम्मेदारी |

रविकर लंगड़ी मार, ख़िलाड़ी नहीं गिराओ |
अहंकार व्यवहार, बाज बड़बोले आओ ||

पहले तल्ले के लिए, नहीं नींव मजबूत । 
दूजे तल्ले के पिलर, आप करे आहूत । 

आप करे आहूत, हड़बड़ी पूर्ण कार्य है । 
घूरें घर यमदूत, घूरता अघ-अनार्य है । 

माना दिल्ली दाँव, पड़े नहले पे दहले । 
बिन अनुभव ईमान, ढहाए भवन रुपहले ॥ 


7 comments:

  1. आपका लाजवाब अंदाज़ लिखने का ...

    ReplyDelete
  2. आ० बढ़िया लिंक्स व प्रस्तुति , धन्यवाद

    ReplyDelete
  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज शुक्रवार (10-01-2014) को "चली लांघने सप्त सिन्धु मैं" (चर्चा मंच:अंक 1488) में "मयंक का कोना" पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    ReplyDelete