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Friday, 21 February 2014

चरावरी रविकर करे, हरदिन व्यर्थ प्रलाप -


कौआ लाय सुराज, सफल कोयल मन्सूबे-

कौआ कोयल बाज में, होड़ मची है आज |
कोयल के अंडे पले, कौआ लाय सुराज |  

कौआ लाय सुराज, सफल कोयल मन्सूबे |
हर सूबे में खेल, घोसला साला डूबे |

बाज आय नहिं बाज, आज भी इसका हौवा |
बहुमत कैसे पाय, उधर कौआता कौआ ||  

दिल्ली दिखी अवाक, आप मस्ती में झूमे-

खरी खरी कह हर घरी, खूब जमाया धाक |
अपना मतलब गाँठ के, किया कलेजा चाक |

किया कलेजा चाक, देश भर में अब घूमे |
दिल्ली दिखी अवाक, आप मस्ती में झूमे |

डाल गए मझधार, धोय साबुन से कथरी |
मत मतलब मतवार, महज कर रहे मसखरी ||  
पोल खोलते पोपले, सन चौदह के पोल |
किन्तु ढोल में पोल है, कौन सकेगा खोल |
कौन सकेगा खोल, खोल में बैठे छुपकर |
रे मौसेरे चोर, प्रलापी अबतो चुपकर |
कर्महीन-ई-मान, फटाफट रस्ता नापो |
नहीं काम पर ध्यान, व्यर्थ में कागज़ छापो ||

हमारे महानगरों में कूड़ा कचरा एक भयावह समस्या …

Suman 








चरावरी रविकर करे, हरदिन व्यर्थ प्रलाप |
कवि खातिर वरदान ही, पाठक खातिर शाप |

पाठक खातिर शा, कीजिये खातिरदारी |
कूड़ा-कचरा साफ़, नहीं फैले बीमारी |

लेकिन कई कमाँय, मात्र है एक आसरा |
पाएं नियमित आय, फेंकते हम जो कचरा-

ताकें दर्शक मूर्ख, हारते रविकर बाजी-
दखलंदाजी खेल में, करती खेल-खराब |
खले खिलाड़ी कोच को, लेकिन नहीं जवाब |

लेकिन नहीं जवाब, प्रशासक नेता हॉबी |
हॉबी सट्टेबाज, पूँछ कुत्तों की दाबी |

ताकें दर्शक मूर्ख, हारते रविकर बाजी |
बड़ी व्यस्त सरकार, करे क्यूँ दखलंदाजी --


लूलू लूला लचर लॉ, रहा लबलबा प्रांत

तिल तिल कर कातिल मरे, बचे नहीं दुर्दांत | 
लूलू लूला लचर लॉ, रहा लबलबा प्रांत |

रहा लबलबा प्रांत, हमारे मारे पी एम् |
वोट बैंक पॉलिटिक्स, करे जय ललिता सी एम् |

ढोल-ढोल में पोल, हँसे आतंकी खिल खिल |
देख पोल आसन्न, हुवे खुश तीनों कातिल ||,  

5 comments:

  1. आपकी रचनाएं पढ़कर तारीफ में शब्द भी छोटे लगते है
    कविवर, बस माँ शारदे की कृपा यूँही आप पर बरसती रहे,
    आभार !

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (23-02-2014) को " विदा कितने सांसद होंगे असल में" (चर्चा मंच-1532) पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. सुमन जी की वाणी में हम भी शामिल :)

    बहुत खूब !

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  4. सुन्दर रचनाएँ

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  5. सभी रचनाएँ एक दूसरे से बढ़कर.....समसामयिक रचनाएं आपकी खासियत हैं महोदय...
    मनोरंजक और तीखे धारदार व्यंग.....बहुत बढ़िया ....

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