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Monday, 17 February 2014

रविकर भकुआ एक, आपकी लेत बलैया

भैया भ्रष्टाचार भी, भद्रकार भरपूर |
वाँछित करे विकास यह, मुँह में मियाँ मसूर |

मुँह में मियाँ मसूर, कर्मरत कई आलसी |
 देश-काल गतिमान, बदलना नहीं पॉलिसी |

रविकर भकुआ एक, "आप" की लेत बलैया |
रहा जमाना देख, दाग भी अच्छे भैया ॥ 

7 comments:

  1. वाह !क्या बात है -

    भैया भ्रष्टाचार भी, भद्रकार भरपूर |
    वाँछित करे विकास यह, मुँह में मियाँ मसूर |

    मुँह में मियाँ मसूर, कर्मरत कई आलसी |
    देश-काल गतिमान, बदलना नहीं पॉलिसी |

    रविकर भकुआ एक, "आप" की लेत बलैया |
    रहा जमाना देख, दाग भी अच्छे भैया ॥ अति सुन्दर अर्थगर्भित रूपक आज की आवाज़ लिए

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  2. bade dag bade diggaj ..sundar rachna ...

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  3. देश-काल गतिमान, बदलना नहीं पॉलिसी |
    भैया जब इसी में फायदा है सब मस्त हैं तो क्यों लाएं ये बदलाव
    सुन्दर
    भ्रमर ५

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  4. सब को इस में आनंद आ रहा हो तो भला ये परिवर्तन की क्यों सोचें

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