देख रहे है वानगी, जबर एक पर एक |
दिखा रहे हैवानगी, नोच नाच दे फेंक |
नोच नाच दे फेंक, नाच नंगा करता है |
जब तब लेता छेंक, समय पानी भरता है |
कह रविकर कविराय, मनुज चुपचाप सहे हैं |
रोज लगाता चाप, दरिन्दा देख रहे हैं ||
" दुखद समाचार" रूपचन्द्र शास्त्री मयंक के पिताश्री श्रद्धेय घासीराम आर्य जी का देहावसान
रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
साया बापू का उठा, *रूप-चन्द ग़मगीन ।
हैं अर्पित श्रद्धा-सुमन, आत्मा स्वर्गासीन ।
आत्मा स्वर्गासीन, शान्ति से वहाँ विराजे ।
सहे दर्द परिवार, आज पाये जो ताजे ।
कह रविकर कविराय, पिता ने सब कुछ पाया ।
सदा रहें वे साथ, मात्र यह बदन नसाया ॥
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