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Monday, 30 December 2013

आम हुवे *आमात्य कुल, ख़ास काढ़ते खीस-


अच्छा-खासा वर्ष यह, गत वर्षों से बीस |
आम हुवे *आमात्य कुल, ख़ास काढ़ते खीस |
*मंत्री  

ख़ास काढ़ते खीस, देख ईश्वर की सत्ता |
बिन उनके आशीष, हिले ना जग में पत्ता |

हो जग का कल्याण, पूर्ण हो जन-गण आसा |
हों हर्षित तन-प्राण, वर्ष हो अच्छा-खासा ||

Monday, 31 December 2012

रविकर की कामना, चतुर्दिक प्रेम हर्ष हो-






 मंगलमय नव वर्ष हो, फैले धवल उजास ।
आस पूर्ण होवें सभी, बढ़े आत्म-विश्वास ।

बढ़े आत्म-विश्वास, रास सन तेरह आये ।
शुभ शुभ हो हर घड़ी, जिन्दगी नित मुस्काये ।

रविकर की कामना, चतुर्दिक प्रेम हर्ष हो ।
सुख-शान्ति सौहार्द, मंगलमय नव वर्ष हो ।।


नए वर्ष में शपथ, मरे नहीं मित्र दामिनी-
 दाम, दामिनी दमन, दम, दंगा दपु दामाद ।
दरबारी दरवेश दुर, दुर्जन जिंदाबाद ।

दुर्जन जिंदाबाद, अनर्गल भाषण-बाजी ।
कर शब्दों से रेप, स्वयंभू बनते गाजी ।

बारह, बारह बजा, बीतती जाय यामिनी । 
नए वर्ष में शपथ, मरे नहीं मित्र दामिनी ।।



मित्र-सेक्स विपरीत गर, रखो अपेक्षित ख्याल- रविकर 
विनम्र श्रद्धांजलि 
ताड़ो नीयत दुष्ट की,  पहचानो पशु-व्याल |
मित्र-सेक्स विपरीत गर, रखो अपेक्षित ख्याल |


रखो अपेक्षित ख्याल, पिता पति पुत्र सरीखे
 बनकर सच्चा मित्र,
हिफाजत करना सीखे ||


एक घरी का स्वार्थ, जिन्दगी नहीं उजाड़ो |
जोखिम चलो बराय, मुसीबत झटपट ताड़ो ||


बलात्कार के बाद की ज़लालत


यह तो है बेहूदगी, होय दुबारा रेप ।
सड़ी व्यवस्था टेस्ट की, गया डाक्टर खेप ।
गया डाक्टर खेप, योनि में ऊँगली डाले ।
सम्भावना का खेल, गलत ही पता लगा ले ।
बार बार बालात, नहीं यह रविकर सोहै ।
रीति चुनो आधुनिक, बेहूदगी यह तो है ।

हिम्मत जुटा जटायु, बजा दे घंटी रविकर -

दुर्जन निश्चर पोच अघ, फेंकें काया नोच ।
विकृतियाँ जब जींस में, कैसे बदले सोच ?
कैसे बदले सोच, नहीं संकोच करे हैं ।
है क़ानूनी लोच, तनिक भी नहीं डरे हैं ।
हिम्मत जुटा जटायु, बजा दे घंटी रविकर ।
करके रावण दहन, मिटा दे दुर्जन निश्चर ।।


अस्त-व्यस्त नेटवर्क, ग्राम में बहुत व्यस्त था-रविकर

 सादर नमस्ते 
विदा 2012
स्वागत है 2013 
"क्षमा"
 व्यस्त बहुत रविकर रहा, कुहरा पाला शीत ।
दो डिग्री था न्यूनतम, यू पी से भयभीत ।
  यू पी से भयभीत, भाग के झारखंड में ।
नौ डिग्री में मौज, मजे से आज ठण्ड में ।
लम्बा यह व्यवधान, कर्म में किन्तु मस्त था ।
अस्त-व्यस्त नेटवर्क, ग्राम में बहुत व्यस्त था ।।
कर्तव्य पथ 
विसराता मनुष्य ।
अधिकार पर 
हर्षाता युग ।।
 निकृष्ट जीवन 
आत्मा अशुद्ध 
भूलता यथार्थ 
अनर्गलता पुष्ट ।।
चेतो रे चश्मों 
बहाओ प्रेमनीर 
देखने को हर्षित 
नववर्ष है अधीर ।। 
 शुभकामनायें