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Sunday, 12 August 2012

सीनाजोरी कर सके, वही असल है चोर

 
 शालिनी कौशिक

प्रोन्नति-पैमाना बने, पिछला कौशल-कार्य |
इसमें आरक्षण गलत, नहीं हमें स्वीकार्य ||

Asha Saxena 

 इधर गहनतम तम दिखा, तमतमाय उत लोग |
तमसो मा ज्योतिर इधर, करें लोग उद्योग |
करें लोग उद्योग, उधर बस चांदी काटें |
रिश्वत चोरी छूट, लूट कर हिस्सा बाटें |
रविकर कुंठित बुद्धि, नहीं कोशिश कर जीते |
बेढब सत्तासीन, लगाते इधर पलीते ||

 (Arvind Mishra) 
 सीनाजोरी कर सके, वही असल है चोर |
माफ़ी मांगे फंसे जो, कहते उसे छिछोर ||

चाँद , उमर के साथ दिखाये , प्राणप्रिये


हरदम आकर धूम मचाये मनमौजी |
चमचे से ही हलुवा खाए मनमौजी |
तिरछे चितवन की चोरी न पकड़ी जाये-
चुपके से झट दायें बाएं मनमौजी |
चंदा सारी रात ताकता निश्चर हरकत -
चंदा मोटा हिस्सा पाए मनमौजी |
फिजा गई सड़ गल कर छोड़ी यह दुनिया-
चाँद आज भी मौज मनाये मनमौजी ||

Untitled

कविता विकास
काव्य वाटिका

मोहपाश में जकड़ी जकड़ी, कड़ी कड़ी हरदिन जोडूं |
बिखरी बिखरी तितर-बितर सब, एक दिशा में कित मोडूं |
रविकर मन की गहन व्यथा में, अक्श तुम्हारे क्यूँ छोडूं-
यादें तेरी दिव्य अमानत, यादों की लय न तोडूं ||

 संस्कारित शान्ति

कमल कुमार सिंह (नारद ) 
मुहाजिरों की बसी बस्तियां, और सरायें बनवाना |
मियांमार के मियां बुलाओ, कैम्प असम में लगवाना |
आते जाते खाते जाते, संसाधन सीमित अपने-
मनमोहन की दृष्टि मोहनी, फिर से अपनी राय बताना ||
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7 comments:

  1. बेहतरीन प्रस्‍तुति।

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  2. आपके अंदाज़ की हलचल ... लाजवाब ..

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  3. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगल वार १४/८/१२ को चर्चाकारा राजेश कुमारी द्वारा चर्चामंच पर की जायेगी आपका स्वागत है|

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