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Monday, 6 August 2012

ठगी खड़ी इस गाँव, *अड़डपोपो अड़ियल की-रविकर

"ग़ज़ल-खेल समय का बहुत अजब" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

अजब-गजब अंदाज है, दिल तो है बेचैन |
चैन सजा के होंठ पर, सजा सजा सा सैन |


सजा सजा सा सैन, कहाँ रक्खी बत्तीसी |
हास्य-व्यंग पर कसक, कसक निकलेगी खीसी |


माना उम्रदराज, देह घेरे बीमारी |
फिर भी करिए नाज, अभी भी बची खुमारी ||

चुटकी का बजना सार्थक होता है !!!

सदा
SADA
उड़ा चुटकियों पर रहा, चालू चुटकी बाज |
करूँ चुटकियों में ख़तम, तेरी यह आवाज |

तेरी यह आवाज, चुटकना चुटकी भरना |
समझौते का साज, तोड़ के व्यर्थ अकड़ना |

है मेरा यह स्नेह, गेह रूपी यह नौका |
खेती बिन संदेह, कहो जब दूँगी चौका |

पंडित श्री लालकृष्ण आडवाणी!!

अड़-डंडा झुकता गया,  अड़-वाणी की नाव ।
हिचकोले खाने लगी, ठगी खड़ी इस गाँव ।

ठगी खड़ी इस गाँव, *अड़डपोपो अड़ियल की |
पी एम् होगा वहीँ , पार्टी जो मरियल सी |
*शुभाशुभ बताने वाला |

कांग्रेस दो अंक, किन्तु चुप्पी भाजप पर  |
पाए ना दो सीट, आस अन्ना की बेहतर ||
जियो जिन्दगी धीर धर, नीति-नियम से युक्त |
परहितकारी कर्म शुभ, हंसों ठठा उन्मुक्त || 


पता न था वक्त ऐसे बदल जाएगा

Maheshwari kaneri 

वक्त वक्त की बात है, बढ़िया था वह दौर |
समय बदलता जा रहा, कुछ बदलेगा और |


कुछ बदलेगा और, आग से राख हुई जो |
पानी धूप बयार, प्यार से तनिक छुई जो  |


मिट जायेगा दर्द, सर्द सी सिसकारी में |
ढक जाएगा गर्द, और फिर लाचारी में |


 आत्महत्याएं 
दो दो हरिणी हारती, हरियाणा में दांव |
हरे शिकारी चतुरता, महत्वकांक्षा चाव |

महत्वकांक्षा चाव, प्रेम खुब मात-पिता से |
किन्तु डुबाती नाव, कहूँ मैं दुखवा कासे |

करे फिजा बन व्याह, कब्र रविकर इक खोदो |
दो जलाय दफ़नाय, तड़पती चाहें दो-दो ||

5 comments:

  1. अरे वाह...!
    अब पता लगा कि मुँह पर चेन लगाने के क्या फायदे हैं।
    सुन्दर कुण्डलियों में बाँधा है आपने सबको!

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  2. कुण्डलियों में बाँधा समा,मुख पर चैन लगाय
    रविकरजी है टीपते,पढकर सबका मन भरमाय,,,,,

    आभार रविकर जी,,,,

    RECENT POST...: जिन्दगी,,,,

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  3. बहुत सुन्दर रविकर जी,,,, मुझे शामिल करने के लिए आप का आभार..

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  4. बहुत - बहुत आभार

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  5. अच्छे लिंक पढवाए ,ऐसे आप टिपियाए .
    ठगी खड़ी इस गाँव, *अड़डपोपो अड़ियल की |
    पी एम् होगा वहीँ , पार्टी जो मरियल सी |

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