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Tuesday, 21 August 2012

करता लेख हरण, नाम अपने छपवाते

वेब-पत्रिकाओं और ब्लॉग से चोरी हो रही हैं रचनाएँ : मुंबई से प्रकाशित 'संस्कार' पत्रिका का कारनामा

 
 संस्कार यह राक्षसी, पर नारी को छीन |
अंत:पुर में कैदकर, करे जुल्म संगीन |

करे जुल्म संगीन, कहो कमलेस कहानी |
सजा स्वयं तज्बीज, दर्ज कर फर्द बयानी |

करता लेख हरण, नाम अपने छपवाते |
आओ रविकर शरण,  आज ही पाठ पढ़ाते ||

अब पोते को पालती...डॉ. श्याम गुप्त

डा. श्याम गुप्त 
ज़िंदा  है  माँ  जानता, इसका मिला सुबूत ।
आज पौत्र को पालती, पहले पाली पूत ।

पहले पाली पूत, हड्डियां घिसती जाएँ ।
करे काम निष्काम, जगत की सारी माएं ।

 किन्तु अनोखेलाल, कभी तो हो शर्मिन्दा ।
दे दे कुछ आराम, मान कर मैया ज़िंदा ।।  

क्वचिदन्यतोSपि..
"अब खुश न" का अर्थ क्या, ख़तम हो गया दर्प |
प्राकृत है फुफकारना, सदा सर्पिणी - सर्प |

सदा सर्पिणी - सर्प, हर्प पर झंझट कर लो |
डसने को तैयार, सामने से ही टर लो |

बिना द्वेष बिन प्यार, करेंगे गुरु ब्लॉगरी |
गरियाये घनघोर, लगा के चले हाजिरी ||


Bibhas Munshi ने Hope India का चित्र साझा किया

भ्रष्टासुर रावण सरिस, बीस भुजा दस माथ |
सदियों से पैदा खलिश, किन्तु लगे न हाथ |

किन्तु लगे न हाथ, करे खुद पूर तमन्ना |
मिलीभगत मिल साथ, करे क्या बाबा अन्ना |

रहे स्वार्थ में डूब, आम जनता  है पापी |
जाति धर्म पर वोट, असुर यह बड़ा प्रतापी || 

अलिप्त


पावन साक्षी भाव से, आत्म दीप का तेज |
राजकर्म कर चाव से, ज्योति रखूं सहेज | 


ज्योति रखूं सहेज,  कार्य पूरा करना है |
लोभ हर्ष उपभोग, मोह में न पड़ना है |


नियत कार्य कर पूर्ण, मानता कर ली पूजा |
वाह अलिप्त विदेह, यहाँ तुम सम न दूजा ||


बांछे खिलना  
बाँझिन को हो पुत्र रत्न, बने बांगड़ू बीर |
मिले हूर लंगूर को, जीत जाय तकरीर | 
जीत जाय तकरीर, तभी तो बांछे खिलती |
विकसित होती कली, चीज मनचाही मिलती |
अभिलाषा इक अर्थ, फूल कर कुप्पा होना |
कुप्पी का क्या काम, नीद गहरी फिर सोना || 


ख़्वाब देखना 
अनलिमिटेड सपने दिखा, ठगे गुरू घंटाल |
लुटते औंधे मुंह पड़े, समय माल कंगाल |
समय माल कंगाल, गुजरती बदहाली में |
ऊँचे ऊँचे ख़्वाब, बहे गन्दी नाली में |
पहले लो मुंह धोय,  और औकात आँक लो |
तदनुसार हों ख़्वाब, उछलकर ऊँच झाँक लो || 

4 comments:

  1. हौसला कभी कम न हो
    कभी बेकार ग़म न हो
    दुआ हमारी यही है

    कविता अच्छी लगी.
    ईद मुबारक .
    http://mushayera.blogspot.in/2012/08/nice-hindi-poem.html

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  2. क्या अदा
    क्या जलवे
    इसके आगे
    तेरे पारो
    नहीं कहते हैं
    हम तो बस
    आपके लिखे
    हुऎ के चहेते हैं !

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  3. "chaury britti ab badh rahi,sab have gambhir,barana es vimari khul jayegi takdir" dat kar virodh karna hoga

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