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Wednesday, 27 April 2011

गर हो इजाजत तेरी, इक बार छू के देखूं

18-11-1994 की वो पाती,  जो पाती तो -
हम जानते हैं 'रविकर', जिस चीज की जरूरत 
जो ढूंढ़ते हो आशिक - महबूब खूबसूरत !
                 न खूबसूरत हूँ मैं, गबरू-जवान इतना 
                 पर प्यार पूरा पाए, तू  चाहती है जितना 
तुझसे न कुछ भी चाहूँ , चाहूँ तो बात इतनी 
मीठी औ मद्धिम बोली, मधु में मिठास जितनी 
                 इक आँच  सी  लगे है, जो पास तेरे होता   
                 तू  साथ  मेरे  होती, सपने  रहूँ  पिरोता 
मस्ती तुम्हारी देखी तेरा बदन निहारा
ऐ जान जाने-जाना, दे दे तनिक सहारा 
                 तुझ  सा  न  मैंने  कोई,  है  खूबसूरत  देखा 
                 मलमल सी काया सुन्दर, हाथों की भाग्य-रेखा  
गर हो इजाजत तेरी, इक बार छू के देखूं 
इक बार छू के देखूं ,  दो  बार छू के देखूं        

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