Follow by Email

Thursday, 4 August 2011

नाग-देवता माफ़ कीजिये ||

नाग-देवता माफ़ कीजिये,
मार  कुंडली  दूध  पीजिये |

पूज  पञ्चमी  पाँच पंच की,
विष-विशेष तो मंगा लीजिये || 

        पहला- रहा बहला 
 
वाणी इनकी मधुर-विषैली,
नित बाढ़े *विषयाधिप थैली |

जड़े जमा *विषयांत पार भी ,
*विषा स्विस-बैंकों तक फैली ||

बिल में गहरी सांस खींचिए,
नाग-देवता माफ़ कीजिये ||
 विषयाधिप = शासक   विषा = कडुवी-तरोई   विषयांत= देश की सीमा 
  
      दूसरा- सिरफिरा 

विष-विस्फोट कराता घूमे,
दर्दनाक  मंजर  पर  झूमे |

आयातित-विष का भंडारी
मौत भरी है इसके फू-में  ||

वारदात पर हाथ मींजिये,
नाग-देवता माफ़ कीजिये || 
           
         तीसरा- पशु निरा

दूध - दवा - फल - सब्जी - ठेला
*विष्कलन का व्याधिक खेला |

महा-मिलावट जहर-खुरानी,
विषान्नों  का  लागे  मेला ||

इन सबका इन्साफ कीजिये,
नाग-देवता माफ़ कीजिये ||
 विष्कलन = आहार 
           
    चार- खौफ का व्यापार

माफिया मर्फ़िया सा घातक
पुश्तों का  बड़-पापी पातक |

अपना हित साधे ये  प्राणी 
जन-संसाधन का है बाधक ||

इनको सारी जगह दीजिये,
नाग-देवता माफ़ कीजिये ||
           
    पांच-नंगा नाच   
जैसे जैसे पेट बढ़ रहा 
वैसे-वैसे रेट बढ़ रहा |

उन्नत विष का दंड मंगाया,
बेकसूर बे-मौत मर रहा ||

छटे-छ्टों को साफ़ कीजिये   ,
नाग-देवता माफ़ कीजिये ||
 

19 comments:

  1. प्रिय रविकर जी व्यंग्य से भरी रचना विष नाग देवता का नाग पंचमी पर गजब लहराया और सब कुछ फू करके बताया काश ये नाग वहां जा के फू कर देता जहाँ अब इसकी जरूरत है जो लोगों को विष बाँट रहे हैं -
    नाग देवता वहां जाइये
    गले में उनके लिपट जाइए
    जब भी गलत करें वे सोचें
    यम बैठा है चाबुक ले के !!
    भ्रमर ५

    ReplyDelete
  2. http://veerubhai1947.blogspot.com/
    मंगलवार, २ अगस्त २०११
    यौन शोषण और मानसिक सेहत कल की औरत की ....इसीलिए
    http://sb.samwaad.com/2011/08/blog-post.h
    aayaatit vish kaa bhandaari आयातित विष का भंडारी ,नाग देवता माफ़ कीजिए ,जनता को इन्साफ दीजिए ,सब जालों को साफ़ कीजिए .

    ReplyDelete
  3. श्रेष्ठ और शानदार व्यंग्य ......आभार

    ReplyDelete
  4. नाद देवता का तो पता नहीं, पर जाट देवता खुश हुए।

    ReplyDelete
  5. अच्छे शब्द चित्र हैं!
    नागपंचमी की शुभकामनाएँ!

    ReplyDelete
  6. छटे-छ्टों को साफ़ कीजिये ,
    नाग-देवता माफ़ कीजिये ||

    ReplyDelete
  7. काहे को भाजी बिदेश रे सुन दुर्मुख मेरे -

    ReplyDelete
  8. naagpanchmi ke madhyam se kitni ghahri vyang bhari prastuti di hai aapne...bahut umdaa.pahli baar aapke blog par aai hoon.bahut achcha laga aakar.

    ReplyDelete
  9. बहुत सुन्दर और ज़बरदस्त व्यंग्य! बेहतरीन प्रस्तुती!
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://www.seawave-babli.blogspot.com/
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

    ReplyDelete
  10. रविकर जी , बहुत सरलता से आपने कितना कुछ कह दिया ।

    ReplyDelete
  11. सरलता से आपने कितना शानदार व्यंग्य कह डाला......आभार

    ReplyDelete
  12. Excellent creation with great satire.

    ReplyDelete
  13. तीखा पर साथ ही मीठा भी ये व्यंग्य

    ReplyDelete
  14. वाह ...बहुत खूब ।

    ReplyDelete
  15. टेढ़ी बातों को आपने खूबसूरती से सीधे-सीधे कह दी।
    आपकी कविताओं का अंदाज़ निराला है।

    ReplyDelete