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Wednesday, 9 October 2013

टोटे-टोटे दिल किया, बोटी बोटी देह-



नैना साहनी हत्याकांड -उच्चतम न्यायालय अपने निर्णय पर पुनर्विचार करे .




Supreme Court

तन्दूरी में दे पका, जिससे रहा सनेह |
टोटे-टोटे दिल किया, बोटी बोटी देह |

बोटी बोटी देह, उसे तड़पाया काटा |
लगा लगा अवलेह, दुष्ट हर टुकड़ा चाटा |

फाँसी करती मुक्त, सजा होती ना पूरी  |
अब आजीवन कैद, खाय खुद की तन्दूरी |



अपने-अपने ज़माने का .....ये बचपन !!!

Ashok Saluja 

बचपन तब का और था, अब का बचपन और |
दादी की गोदी मिली, नानी हाथों कौर |

नानी हाथों कौर, दौर वह मस्ती वाला |

लेकिन बचपन आज, निकाले स्वयं दिवाला |

आया की है गोद, भोग पैकट में छप्पन |

कंप्यूटर के गेम, कैद में बीते बचपन ||

दौरे दिल का दर्द इत, उत दौरे पर पूत |

सुतके दौरे बेधड़क, *पिउ बे-धड़कन *सूत ||

*पिता
*सो गया

.

दुरवाणी ही याद रहेगी यूँ आखिर -सतीश सक्सेना

सतीश सक्सेना 
लगे लड़ाका लड़कियां, निश्चय होवे भोर |
सुनता सुरवाणी सरस, हरस रहा मन मोर |

हरस रहा मन मोर, बात दिल की कह देती |
मैया दिखे प्रसन्न, बलैयाँ सौ सौ लेती |

कह रविकर आशीष, मिले नित दुर्गे माँ का |
पाती वे अधिकार, आज जो लगे लड़ाका || 


अपनी राम कहानी में.

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया

दिल के दौर तीन पड़े पर, गति समुचित है नाड़ी की |

लश्कर बिन हथियार दिखे अब, धार तेज पर वाणी की |
शब्दों के व्यवहार बदलते, जब से जग में देखा है-
भावों पर विश्वास करें नहिं-बातें समझ अनाड़ी की | 




दे लालू पर दाग, दगा दे दहुँदिश दरजी-

दरजी दहुँदिश दर्जनों, कैंची सरिस जुबान |
काट-छाँट में रत मगर, मुखड़े पर मुस्कान |

मुखड़े पर मुस्कान, दिखी खुदगर्जी घातक |
रविकर नाक घुसेड, थोपते मर्जी पातक |

सी बी आई तेज, मुलायम माया गरजी |
दे लालू पर दाग, दगा दे दहुँदिश दरजी ||


सुन्दर मन के भाव अति, सधे सधाए वर्ण |
सुनकर के संतृप्त हुवे,, परिणीता के कर्ण |
परिणीता के कर्ण, युगल को बहुत बधाई |
शुद्ध समर्पण देख, ख़ुशी घर आँगन छाई |

ठुमुक ठुमुक शिशु देख, खिले रविकर का अन्तर |
यही आज आशीष, बने जीवन यह सुन्दर || 



8 comments:

  1. बढ़िया सूत्र और कमाल की कुण्डलियाँ ।

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  2. हमेशा की तरह बेहतरीन !

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  3. बढ़िया सूत्र ..

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  4. अच्छे सूत्रों के साथ लिंक लिखाड़ !!

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  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बृहस्पतिवार (10-10-2013) "दोस्ती" (चर्चा मंचःअंक-1394) में "मयंक का कोना" पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का उपयोग किसी पत्रिका में किया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    शारदेय नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  6. बढ़िया लिंक्स के साथ सुन्दर प्रस्तुति ..

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  7. मार्मिक प्रसंग .कर्म भोगना बाकी है अभी तंदूरी लाल की .

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  8. रविकर जी आपकी लेखनी को नमस्कार ......

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