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Wednesday, 30 October 2013

रे आतंकी मूर्ख, आत्मघाती ये घटना -

लोहा है हर देह में, भरा अंग-प्रत्यंग |
मगर अधिकतर देह में, मोह-मेह का जंग |

मोह-मेह का जंग, जंग लड़ने से डरता |
नीति-नियम से पंगु, कीर्ति कि चिंता करता |

लौह पुरुष पर एक, हमें जिसने है मोहा |
किया एकजुट देश, लिया दुश्मन से लोहा ||







 घटना करता था कहीं,  छिप बिहार में जाय |
भटकल क्या पकड़ा गया, जाती बुद्धि नशाय |

जाती बुद्धि नशाय, खाय मृग झाड़ी-पत्ती |
देखे सिंह शिकार, करे गुल रविकर बत्ती |

बोध गया विस्फोट, व्यर्थ दहलाया पटना |
रे आतंकी मूर्ख, आत्मघाती ये घटना || 

गंडा बाँधे फूँक कर, थू थू कर ताबीज |
गड़ा खजाना खोद के, रहे हाथ सब मींज |
रहे हाथ सब मींज, मरी चुहिया इक निकली |
करे मीडिया मौज, उड़ा के ख़बरें छिछली |
रकम हुई बरबाद, निकलते दो ठो हंडा |
इक तो भ्रष्टाचार, दूसरा  प्रोपेगंडा |



सुरेश स्वप्निल की प्रकाशित, अप्रकाशित हिन्दी कविताओं का संग्रह्

अति-नायक के हाथ सत्ता


अति नायक को छोड़िये, आया पाक विचार |
धाक धमाके सब जगह, अंदर बाहर मार |

अंदर बाहर मार, धार्मिक जेहादी का |

करते खुला प्रचार, मिला दुनिया का ठीका |

शुतुरमुर्ग सा बंद, आँख रविकर कर लेगा |

नहीं दिखे उन्माद, दिखाओ ऐसे ठेंगा ||

गलतियां गिनाने के बजाय अपनी गलतियां सुधारियें, नीतीश जी !

S.K. Jha 

घटनाएं जब यकबयक, होंय खड़ी मुँह फाड़ |
असमंजस में आदमी, काँप जाय दिल-हाड़ |

काँप जाय दिल-हाड़, बचाना लेकिन जीवन |
आये  लाखों लोग, जहाँ सुनने को भाषण |

कर तथ्यों की बात, गलतियां ढूंढे पटना |
सह मोदी आघात, सँभाले प्रति-दुर्घटना ||

देता शौचालय बचा, मोदी जी की जान-

रविकर लखनऊ में २०-१०-१३ : फ़ोटो मनु
देता शौचालय बचा, मोदी जी की जान |
अभी अभी जो दिया था, तगड़ा बड़ा बयान |

तगड़ा बड़ा बयान, प्रथम शौचालय आये |
पीछे देवस्थान, गाँव आदर्श बनाये |

मानव-बम फट जाय, और बच जाता नेता |
शौचालय जय जयतु, बधाई रविकर देता ||

देहात


दीप एक : रंग अनेक









विविध रंग के दीप ये, फैला धवल प्रकाश |
लोचन दो राजीव में, जगा रहे हैं आस ||


Tuesday, 29 October 2013


होती है लेकिन यहाँ, राँची में क्यूँ खाज-

(1)
दंगे के प्रतिफल वहाँ, गिना गए युवराज |
होती है लेकिन यहाँ, राँची में क्यूँ खाज |

राँची में क्यूँ खाज, नक्सली आतंकी हैं |
ये आते नहिं बाज, हजारों जानें ली हैं |

अब सत्ता सरकार, हुवे हैं फिर से नंगे |
पटना गया अबोध, हुवे कब रविकर दंगे ||
(2)
हुक्कू हूँ करने लगे, अब तो यहाँ सियार |
कब से जंगल-राज में, सब से शान्त बिहार |

सब से शान्त बिहार, सुरक्षित रहा ठिकाना |
किन्तु लगाया दाग,  दगा दे रहा सयाना |

रहा पटाखे दाग, पिसे घुन पिसता गेहूँ |
सत्ता अब तो जाग, बंद कर यह हुक्कू हूँ -


ले मोदी को रोक, जमा हैं सोलह *गालू -

रविकर लखनऊ में २०-१०-१३ : फ़ोटो मनु 
चालू संयोजन हुआ, थर्ड फ्रंट  का शोर |
पॉलिटिक्स को मोड़ने, चले तीसरी ओर |

चले तीसरी ओर, सजाई अपनी घोड़ी |
जागी है उम्मीद, कहीं कुछ थोड़ी-मोड़ी |

ले मोदी को रोक, जमा हैं सोलह *गालू |
बने सीट कुछ जीत, किंग मेकर ये चालू ||
*गाल बजाने वाले 

6 comments:

  1. bahut badhiya .........aatanki ghatnao se man bahut dukhi ho jata hai..........

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  2. बहुत सुंदर चर्चा !

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति आभार आपके स्नेह के लिए .

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  4. बहुत सुंदर ! आ. रविकर जी . आभार ! आपके स्नेह के लिए.

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  5. बहुत सुन्दर |दीवाली की शुभकामनाएं ,
    नई पोस्ट हम-तुम अकेले

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