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Wednesday, 30 October 2013

आई की कांगरेस, व्यर्थ ही रेस लगाती-

रविकर लखनऊ में २०-१०-१३ : फ़ोटो मनु 





रूपचन्द्र शास्त्री मयंक 



फगवाड़ा भी मस्त है, छिंदवाड़ा भी मस्त |
कहीं अकाली लड़ रहे, कहीं कमल अभ्यस्त |

कहीं कमल अभ्यस्त, कहीं हो रहे धमाके |
देते गलत बयान, दुलारे अपनी माँ के |

जाती नीति बिलाय, धर्म हो जाता अगवा |
रही दुष्टता जीत, खेलती घर घर फगवा ||


बपौती

कमल कुमार सिंह (नारद ) 







इसीलिए तो कमल को, तोप रही कांग्रेस |
बेमतलब क्यूँ तोप से, जगा रहे यह देश |

जगा रहे यह देश, लोक हित नारद घूमे |
लेकिन दारुबाज, पिए बिन संसद झूमे |

असली सिंडिकेट, दफ़न कब का हो जाती |
आई की कांगरेस,  व्यर्थ ही रेस लगाती ||


रावण के क्षत्रप : भगवती शांता : मर्यादा पुरुषोत्तम राम की सगी बहन


 भाग-5
सोरठा
रास रंग उत्साह,  अवधपुरी में खुब जमा |
उत्सुक देखे राह, कनक महल सजकर खड़ा ||

चौरासी विस्तार, अवध नगर का कोस में |
अक्षय धन-भण्डार,  हृदय कोष सन्तोष धन |

पाँच  कोस विस्तार, कनक भवन के अष्ट कुञ्ज |
इतने ही थे द्वार, वन-उपवन बारह सजे ||

शयन-केलि-श्रृंगार, भोजन-कुञ्ज-स्नान-कुञ्ज |
झूलन-कुञ्ज-बहार, अष्ट कुञ्ज में थे प्रमुख || 

चम्पक-विपिन-रसाल, पारिजात-चन्दन महक |
केसर-कदम-तमाल, नाग्केसरी-वन विचित्र ||



कर नारायण ना नुकुर, गर है नारा ढील -


नारा से नाराजगी, नौ सौ चूहे लील |
कर नारायण ना-नुकुर, गर है नारा ढील | 

गर है नारा ढील, नहीं हज-हाजत जाना |
जा बाबा को भूल, स्वयं की जान बचाना |

नेता नारा भक्त, नहीं अब कोई चारा |
दाढ़ी बाल बनाय, पकड़ के भाग किनारा ||

सुरेश स्वप्निल की प्रकाशित, अप्रकाशित हिन्दी कविताओं का संग्रह्

अति-नायक के हाथ सत्ता


अति नायक को छोड़िये, आया पाक विचार |
धाक धमाके सब जगह, अंदर बाहर मार |

अंदर बाहर मार, धार्मिक जेहादी का |
करते खुला प्रचार, मिला दुनिया का ठीका |

शुतुरमुर्ग सा बंद, आँख रविकर कर लेगा |
नहीं दिखे उन्माद, दिखाओ ऐसे ठेंगा ||


सत्य वचन थे कुँवर के, आज सुवर भी सत्य |
दोष संघ पर दें लगा, बिना जांच बिन तथ्य | 

बिना जांच बिन तथ्य, बड़े बडबोले नेता |
हुई सभा सम्पन्न, सभा के धन्य प्रणेता |

बीता आफत-काल, हकीकत आये आगे |
फिर से खड़े सवाल, किन्तु सुन नेता भागे ||


3 comments:

  1. वाह...।
    कमाल है।
    बहुत बढ़िया ढंग से टिपिया दिया आपने तो।

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  2. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 31-10-2013 के चर्चा मंच पर है
    कृपया पधारें
    धन्यवाद

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  3. बहुत खूब यहां भी और वहां भी :)

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