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Thursday, 3 October 2013

शुचिता पर की टिप्पणी, जोह शौच की बाट-

  
'देवालय'बनाम 'शौचालय'
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Akanksha Yadav

 देवा रे देवा गजब, हिन्दू हृदय सम्राट |
शुचिता पर की टिप्पणी, जोह शौच की बाट |

जोह शौच की बाट, नहीं मिलता शौचालय |
खड़ी हो गई खाट, खफा करते  देवालय |

जन्म भूमि पर चोट, करें जयराम *कुटेवा |
मोदी के भी वोट, काट लेंगे अब देवा ||
*बुरी आदत वाला 

इस देश को कुछ लोग चला रहे है : राहुल गांधी (मगर 

पिटाई क्यू हुई ? )

मार कुटाई फाड़ा फाड़ी, की क्या करते बात |
नेता बुड्ढा मार खा रहा, इसकी जो औकात |

युवा युवा युवराज हमारे, हो हाथों में खाज |
अध्या ही क्या देश फाड़ दे, क्यूँ कर आयें बाज |

दिखते हैं इकलौते वारिस, मनमोहन का ताज |
जब चाहेंगे रख लें सिर पर, समझ बाप का राज ||

काजल कुमार के कार्टून


प्रणव नाद से मुखर जी, रोके अनुचित चाह |
वाह वाह युवराज की, देता कुटिल सलाह |

देता कुटिल सलाह, मानती किचन कैबिनट |
हो जाते सब चित्त, करा दे बबलू नटखट |

झेल रही सरकार, रोज ही विकट हादसे |
रविकर करता ध्यान, हमेशा प्रणव नाद से ||




दायें बीयर बार पब, बाएं बिकता गोश्त

गाँधी कब का भूलते, दो अक्तूबर दोस्त |

दायें बीयर बार पब, बाएं बिकता गोश्त |

बाएं बिकता गोश्त, पार्क में अनाचार है |


उधम मचे बाजार, तडपती दिखे नार है |

इत मोदी का जोर, बड़ी जोरों की आँधी |


उत उठता तूफ़ान, दिखा गुस्से में गाँधी ||


देह चाहती मेह पर, होवे "रविकर" *रेह

 प्रभु से जो डरकर चले, होय नहीं पथभ्रष्ट |
किन्तु दुष्ट रोमांच हित, चले बाँटते कष्ट ||1||

"आकांक्षा के पर क़तर, तितर बितर कर स्वप्न |
दें अपने ही दुःख अगर, निश्चय बड़े कृतघ्न || 2||

माटी का पुतला पुन:, माटी में मिल जाय |
फिर भी माटी डाल मत, कर उत्थान उपाय ||3||

राजनीति जब वोट की, अपने अपने स्वार्थ |
संविधान बीमार है, मोहग्रस्त है पार्थ || 4||

जीवन की संजीवनी, हो हौंसला अदम्य |
दूर-दृष्टि, प्रभु कृपा से, पाए लक्ष्य अगम्य ||5||

धर्म होय हठधर्म जब, कर्म होय दुष्कर्म |
शर्म होय बेशर्म तब, भेदे नाजुक मर्म ||6||

रहो इधर या उधर तुम, रहना मत निष्पक्ष |
डुबा अन्यथा दें तुम्हें, उभय पक्ष अति-दक्ष || 7||

देह नेह दुःख गेह है, किंचित नहिं संदेह |
देह चाहती मेह पर, होवे "रविकर"  *रेह ||8||

खार मिली हुई मिटटी / ऊसर



11 comments:

  1. बहुत सुंदर लिंक्स और कुण्डलियाँ !

    RECENT POST : पाँच दोहे,

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  2. बहुत ही सुंदर संकलन ओर शानदार लिंक
    शुक्रिया रविकर साहब ...आपने मेरी पोस्ट को स्थान दिया

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  3. बहुत सुंदर लिंक्स..........

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  4. बहुत सुन्दर लिंक्स संयोजन

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  5. सुन्दर प्रस्तुति ....!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (05-10-2013) को "माता का आशीष" (चर्चा मंच-1389) पर भी होगी!
    शारदेय नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  6. जैराम रमेश जी को कांग्रेस का थिंक टैंक समझा जाता था। उनकी एक बौद्धिक उजास रही है लेकिन अब वह काशीराम जी के स्तर पर ही उतर आये हैं जिनकी भारत में कोई बौद्धिक छवि नहीं थी -जो कहते थे-

    तिलक ,तराजू और तलवार ,इनको मारो जूते चार।

    मोदी साहब के "शौचालय " के बयान का मतलब सिर्फ इतना है आदमी का पहले तन पवित्र हो फिर मन की शुचिता हो। फिर वह मंदिर जाए।

    जैराम पूछते हैं -क्या मोदी जी -अयोध्या में एक बड़ा शौचालय बनवाने के काशीराम जी के बयान से सहमत हैं।

    ये ऐसा ही जैसे मुख की जगह गुदा ले ले। पूछा जा सकता है क्या रमेश जी कांग्रेस के सब मंत्रियों के आवासों को ,पंडारा रोड स्थित समस्त आवासों को शौचालयों में बदलवाने को तैयार हैं ?तो फिर देवालय पर बात की जा सकती है।

    उन जैसे बौद्धिक व्यक्ति से ऐसी उम्मीद नहीं थी वह हाई कमान को खुश करने के लिए मुंह से मल करने लगेंगे।

    एक प्रतिक्रिया ब्लॉग पोस्ट :





    शुक्रवार, 4 अक्तूबर 2013

    'देवालय' बनाम 'शौचालय'
    'देवालय' बनाम 'शौचालय' ....मुद्दा फिर चर्चा में है। कभी स्व. काशीराम, कभी जयराम रमेश और अब नरेन्द्र मोदी ....पर इसे मात्र मुद्दे और विचारों तक रखने की ही जरुरत नहीं है, इस पर ठोस पहल और कार्य की भी जरुरत है। आज भी भारत में तमाम महिलाएं 'शौचालय' के अभाव में अपने स्वास्थ्य से लेकर सामाजिक अस्मिता तक के लिए जद्दोजहद कर रही हैं। स्कूलों में 'शौचालय' के अभाव में बेटियों का स्कूल जाना तक दूभर हो जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो काफी बुरी स्थिति है। पहले घर और स्कूलों को इस लायक बनाएं कि महिलाएं वहाँ आराम से और इज्जत से रह सकें, फिर तो 'देवालय' बन ही जाएंगें। इसे सिर्फ राजनैतिक नहीं सामाजिक, शैक्षणिक, पारिवारिक और आर्थिक रूप में भी देखने की जरुरत है !!

    फ़िलहाल, राजनैतिक मुद्दा क्यों गरम है, इसे समझने के लिए पूरी रिपोर्ट पढ़ें, जो कि साभार प्रकाशित है।

    नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने नरेंद्र मोदी को उनके उस बयान पर आडे हाथों लिया है जिसमें उन्होंने देवालय से ज्यादा महत्व शौचालय को देने की बात कही थी। खुद भी ऎसा ही बयान दे चुके रमेश ने कहा कि मोदी ऎसे नेता हैं जो रोज नए रूप में सामने आते हैं। मोदी को यह बताना चाहिए कि क्या वह अयोध्या में महा शौचालय बनाने के कांशीराम के सुझाव से सहमत हैं। एक कार्यक्रम के दौरान टीवी पत्रकारों से बात करते हुए जयराम रमेश ने कहा, अब जब उन्होंने देवालय से पहले शौचालय की बात कह दी है तो उन्हें यह भी साफ करना चाहिए क्या वह अयोध्या में ब़डा सा शौचालय बनवाने के कांशीराम के सुझाव से भी सहमत हैं या नहीं। उन्होंने कहा, कांशीराम जी ने एक रैली में यह सुझाव दिया था।

    उन्होंने कहा, अब मेरे बीजेपी के दोस्त क्या कहेंगे। मोदी के बयान पर वो क्या राय रखते हैं। जब मैंने कुछ ऎसा ही बयान दिया था तो विरोध हुआ। राजीव प्रताप रूडी और प्रकाश जावडेकर ने मुझपर धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया पर अब वे क्या कहेंगे। इनके अलावा कुछ संगठनों ने विरोध का बेहद ही खराब तरीका अपनाया और मेरे घर के सामने पेशाब की बोतल रख दी। मोदी पर निशाने साधते हुए उन्होंने कहा, चलो देर से ही सही पर मोदी को ज्ञान तो मिला पर उनकी ये बयानबाजी सिर्फ राजनीति के कारण है क्योकि गुजरात के सीएम पीएम बनने का सपना देख रहे हैं। जयराम रमेश ने कहा कि खुद को हिंदुत्ववादी बताने वाले मोदी अब नए अवतार में सामने आए हैं। वह ऎसे नेता हैं जो रोज नए अवतार में सामने आते हैं। हमारे यहां दशावतार की बात कही जाती है, लेकिन उनके लिए यह शब्द कम पडेगा। वह शतावतार वाले नेता हैं। रमेश ने मोदी के शौचालय वाले बयान पर निशाना साधते हुए कहा कि 2011-12 में गुजरात सरकार ने दावा किया था कि ग्रामीण इलाकों में लगभग 82 फीसदी घरों में शौचालय हैं, पर सही आंकडा सिर्फ 34 फीसदी है। इससे विकास के दावे पूरी तरह से सामने आ जाते हैं।

    गौरतलब है कि खुद जयराम रमेश ने कुछ दिन पहले ऎसा बयान दिया था कि गांव में मंदिर बनवाने से ज्यादा जरूरी है कि शौचालय की व्यवस्था करना। उनके उस बयान की काफी आलोचना हुई थी। उस बयान के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, मैंने देवालय का नाम नहीं लिया था। लेकिन उस बयान पर हंगामा मचाने वाले लोगों को अब मोदी के इस बयान पर अपना रूख साफ करना चाहिए।

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  7. देवा रे देवा गजब, हिन्दू हृदय सम्राट |
    शुचिता पर की टिप्पणी, जोह शौच की बाट |



    जैराम रमेश जी को कांग्रेस का थिंक टैंक समझा जाता था। उनकी एक बौद्धिक उजास रही है लेकिन अब वह काशीराम जी के स्तर पर ही उतर आये हैं जिनकी भारत में कोई बौद्धिक छवि नहीं थी -जो कहते थे-

    तिलक ,तराजू और तलवार ,इनको मारो जूते चार।

    मोदी साहब के "शौचालय " के बयान का मतलब सिर्फ इतना है आदमी का पहले तन पवित्र हो फिर मन की शुचिता हो। फिर वह मंदिर जाए।

    जैराम पूछते हैं -क्या मोदी जी -अयोध्या में एक बड़ा शौचालय बनवाने के काशीराम जी के बयान से सहमत हैं।

    ये ऐसा ही जैसे मुख की जगह गुदा ले ले। पूछा जा सकता है क्या रमेश जी कांग्रेस के सब मंत्रियों के आवासों को ,पंडारा रोड स्थित समस्त आवासों को शौचालयों में बदलवाने को तैयार हैं ?तो फिर देवालय पर बात की जा सकती है।

    उन जैसे बौद्धिक व्यक्ति से ऐसी उम्मीद नहीं थी वह हाई कमान को खुश करने के लिए मुंह से मल करने लगेंगे।

    एक प्रतिक्रिया ब्लॉग पोस्ट :

    जोह शौच की बाट, नहीं मिलता शौचालय |
    खड़ी हो गई खाट, खफा करते देवालय |

    जन्म भूमि पर चोट, करें जयराम *कुटेवा |
    मोदी के भी वोट, काट लेंगे

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  8. सुंदर लिंक्स सुंदर कुंडलियाँ.

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  9. बहुत सुंदर कुंडलियां !

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