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Wednesday, 2 October 2013

प्रणव नाद से मुखर जी, रोके अनुचित चाह-


काजल कुमार के कार्टून


प्रणव नाद से मुखर जी, रोके अनुचित चाह |
वाह वाह युवराज की, देता कुटिल सलाह |

देता कुटिल सलाह, मानती किचन कैबिनट |
हो जाते सब चित्त, करा दे बबलू नटखट |

झेल रही सरकार, रोज ही विकट हादसे |
रविकर करता ध्यान, हमेशा प्रणव नाद से ||


  

कार्टून :- भरत से खड़ाऊँ वसूलने के दि‍न आए ?

noreply@blogger.com (काजल कुमार Kajal Kumar)


आता जाता क्रोध है, खाता देता फाड़ |
खड़ा खडाऊं के लिए, चला झोंकने भाड़ |
चला झोंकने भाड़, इकट्ठा करता ईंधन |
ऊ धन का उपयोग, जिताए महा इलेक्शन |
मोहन सत्ता सौंप, नहीं अब तुझको भाता |
शहजादे का कोप, इसी से आता जाता ||


जरूरी नहीं सब सबकुछ समझ ले जायें

Sushil Kumar Joshi 


सेकुलर साम्प्रदायिक सही, बन जाओ तुम एक |

डुबो जा मझधार में, देंगे नहिं तो फेंक ||

गांधीजी के नहाने का दिन

Bamulahija dot Com 

गाँधी कब का भूलते, दो अक्तूबर दोस्त |
दायें बीयर बार पब, बाएं बिकता गोश्त |
बाएं बिकता गोश्त, पार्क में अनाचार है |
उधम मचे बाजार, तडपती दिखे नार है |
इत मोदी का जोर, बड़ी जोरों की आँधी |
उत उठता तूफ़ान, दिखा गुस्से में गाँधी ||




पट्टे टें टें कर उठा, राम-राम को भूल |
मिर्ची से कडुवे लगे, पुन: सुपुत्र उसूल |

पुन: सुपुत्र उसूल, तूल ना देते बप्पा |
पोता रहे खिलाय, वंश का जिस पर ठप्पा |

पुत्र बसा परदेश, करें क्यूँ रिश्ते खट्टे |
माता देती डांट, करे चुप अपना *पट्टे |
*तोता

6 comments:

  1. धन्‍यवाद रवि‍कर जी.

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  2. चारा खाके भैंस का जो डकार न लेय ,

    नीति ऐसे राज की खूब बलइयां लेय।

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  3. बढ़िया व्यंग्य विडंबन।

    गाँधी कब का भूलते, दो अक्तूबर दोस्त |
    दायें बीयर बार जब, बाएं बिकता गोश्त |
    बाएं बिकता गोश्त, पार्क में अनाचार है |
    उधम मचाएं लोग, तडपती दिखे नारि है |
    इत मोदी का जोर, बड़ी जोरों की आँधी |
    उत उठता तूफ़ान, बड़े गुस्से में गाँधी ||

    दाएं बीअर बार पब ,बाएँ बिकता गोश्त

    ऊधम मचे बज़ार ,तड़ पती दिखे नार है।

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  4. सुंदर चर्चा आभार !

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  5. आता जाता क्रोध है, खाता देता फाड़ |
    खड़ा खडाऊं के लिए, चला झोंकने भाड़ |
    चला झोंकने भाड़, इकट्ठा करता ईंधन |
    ऊ धन का उपयोग, जिताए महा इलेक्शन |
    मोहन सत्ता सौंप, नहीं अब तुझको भाता |
    शहजादे का कोप, इसी से आता जाता ||
    नहीं देगा तो सर पे खायेगा .

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