Showing posts with label नन्हे-मुन्हे. Show all posts
Showing posts with label नन्हे-मुन्हे. Show all posts
Sunday, 12 February 2012
Thursday, 9 February 2012
राज-तंत्र की बेल, ताकता रायबरेली
राय-बरेली फिर सजे, दिखे नए युवराय ।
नव पीढ़ी जो मंच पर, मम्मी मन हरषाय।
मम्मी मन हरषाय, देख के नाती-नातिन ।
राहुल उम्र-दराज, साल जो बीते छिन-छिन ।
ख़्वाब व्याह का देख, हारती थककर डेली ।
राज-तंत्र की बेल, बढ़ी इन रायबरेली ।।

पाला पोसा शौक से, बढ़ी नहीं जब बेल ।
तब चुनाव के मंच पर, दिखा अनोखा खेल ।
दिखा अनोखा खेल, डोर सत्ता की पकड़े ।
नौनिहाल अल-बेल , खड़े मैया को जकड़े ।
सदियों से परिवार, देश का रविकर आला ।
अगली पीढ़ी ठाढ़, पड़े अब इनसे पाला ।।
Thursday, 28 July 2011
इस कोशिश पर तारीफ करें ||
नन्हे-मुन्हे पांव से,
छोटी-छोटी नाव से |
अपने-अपने गाँव से,
शीतल बरगद छाँव से --
खेल-खेलने आये हैं, मन सबका बहलाए हैं ||
चुन्नू मुन्नू भोर से,
रेस लगाते जोर से,
व्रेवो-व्रेवो शोर से
जमके नाचे मोर से--
सबके मन को भाये हैं, खेल-खेलने आये हैं ||
लम्बी कूद लक्की का
ऊंची कूद विक्की का
जेबलिन थ्रो बाबू का
भार उठाना साबू का---
सोना तमगा लाये हैं, खेल-खेलने आये हैं ||
बड़ी तेज ये हाकी हैं
एकादश जो बाकी है
ध्यानचंद से जादूगर
कीर्ति फैले दुनिया भर--
फिर उम्मीद जगाये हैं, खेल-खेलने आये हैं ||
मैराथन में मीलों भागे,
मुन्ना-प्रांजल सबसे आगे
बड़ी थकावट उनको लागे
किन्तु जीत की आशा जागे---
जम के जोर लगाए हैं, खेल-खेलने आये हैं ||
Subscribe to:
Posts (Atom)
