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Tuesday, 7 February 2012

नौटंकी श्रीमंत, खाय के उगलें रोटी ||

ZEAL पर टिप्पणी
रोटी खाकर यह मुआ, खटिया पर पड़ जाय  |
ज्यों ईंदुर रोटी कुतर, बिल में जाय छुपाए |
बिल में जाय छुपाए, चार दिन बच्चे रोवें |
एक समय का भात, शाम की रोटी खोवें |
वह राखी सावंत, खेलती खोटी गोटी |
नौटंकी श्रीमंत, खाय के उगलें रोटी ||

दिग्भ्रमित ; गुरु-गुरुर को भंग--

मेरी टिप्पणी-राम राम भाई पर

राहुल गांधी और काले झंडे .

अंध-गुरू की मती-मंद, दंद-फंद सह जंग | 
शब्द-कोष में ढूढ़ते, कृष्ण-रंग से दंग |

कृष्ण रंग से दंग, नंग जनता कर देती |
गुरु-गुरुर को भंग, तंग हो झंडा लेती |


जन-मन चंडी-चंड, पंथ-प्रतिबन्ध शुरू की |
  दण्ड करे शत-खंड, सुताई अंध-गुरु की ||