ZEAL पर टिप्पणी
रोटी खाकर यह मुआ, खटिया पर पड़ जाय |
ज्यों ईंदुर रोटी कुतर, बिल में जाय छुपाए |
बिल में जाय छुपाए, चार दिन बच्चे रोवें |
एक समय का भात, शाम की रोटी खोवें |
ज्यों ईंदुर रोटी कुतर, बिल में जाय छुपाए |
बिल में जाय छुपाए, चार दिन बच्चे रोवें |
एक समय का भात, शाम की रोटी खोवें |
वह राखी सावंत, खेलती खोटी गोटी |
नौटंकी श्रीमंत, खाय के उगलें रोटी ||
दिग्भ्रमित ; गुरु-गुरुर को भंग--
मेरी टिप्पणी-राम राम भाई पर
राहुल गांधी और काले झंडे .
अंध-गुरू की मती-मंद, दंद-फंद सह जंग |
शब्द-कोष में ढूढ़ते, कृष्ण-रंग से दंग |
कृष्ण रंग से दंग, नंग जनता कर देती |
गुरु-गुरुर को भंग, तंग हो झंडा लेती |
शब्द-कोष में ढूढ़ते, कृष्ण-रंग से दंग |
कृष्ण रंग से दंग, नंग जनता कर देती |
गुरु-गुरुर को भंग, तंग हो झंडा लेती |
जन-मन चंडी-चंड, पंथ-प्रतिबन्ध शुरू की |
दण्ड करे शत-खंड, सुताई अंध-गुरु की ||
दण्ड करे शत-खंड, सुताई अंध-गुरु की ||