Showing posts with label शक. Show all posts
Showing posts with label शक. Show all posts

Thursday, 1 September 2011

गधे कुछ लाया भारत


वीक फील्डिंग देखता, जब नासिर-मद्रास  |
सीधे-साधे शब्द में, निकले  स्वयं  भड़ास |



इधर मीडिया व्यर्थ, मचाता  जाए हल्ला |
करे कमाई बोर्ड , झाड़कर इससे पल्ला ||
http://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/7/7b/Donkey_1_arp_750px.jpghttp://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/7/7b/Donkey_1_arp_750px.jpg
File:Cricket fielding positions2.svghttp://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/7/7b/Donkey_1_arp_750px.jpghttp://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/7/7b/Donkey_1_arp_750px.jpg

Monday, 4 July 2011

मेरे मित्र दीपक की रचना

मेरे  मित्र  दीपक की,  महा -लफंगों  में   
गिनती  होती  है  यहाँ |
उनकी डायरी का एक पन्ना मिला मुझे 
जस का तस प्रस्तुत है --

शंका   के   बादल  मंडराए  उनको  दूर  करो |
तुम अपने विश्वास सूर्य से जीवन धूप भरो ||

रिस-रिस रिश्ते, रिसते-रिसते रीते हुए नयन |
शादी मुझसे प्यार किसी से कैसा किया चयन ||

 होंठ से बाहर निकले नगमें तेरा नाम लिए |
और किसी की खातिर हमने अपने होंठ सिये ||

सिले होंठ की कसम खामियां कभी नहीं देखी-
तू  ही  मेरी  एक  अकेली  कष्ट  अपार  हरो ||

शंका   के   बादल  मंडराए  उनको  दूर  करो |
तुम अपने विश्वास सूर्य से जीवन धूप भरो ||

                                 चाहत की स्वप्निल  दुनिया में तिनका-तिनका जोड़ा |
                                  प्रिये  बताओ   कारण  क्या   जो  मेरा  सपना  तोडा | |

                                   दर्द  से व्याकुल जीवन में तुम  नश्तर चुभा  रहे |
                                   तड़पाने  से  अंत  भला  क्यों  दुनिया  लुभा  रहे ||

                                    सारी  खुशियाँ  सारा  वैभव  अपने  प्रियतम  पर |
                                    करूँ  निछावर  अपना जीवन  होगी  प्रीति अमर ||     

अमर प्रीति की खातिर दीपक तिल-तिल जलता है |
जलते   दीपक   की   बाती   को   यूँ   न  *पूर  करो ||          *बुझाना      
           
शंका   के    बादल   मंडराए    उनको   दूर   करो |
तुम  अपने  विश्वास  सूर्य  से  जीवन  धूप  भरो ||

Friday, 24 June 2011

नहीं चाहिए पैसा--

कर
असनायी |
सनेही
की नायीं ||
किन्तु
अगर  
अन्देशा,
भेज
सन्देशा --
पिय के देशा ||


छोड़ बिदेशा ||
आजा
है जैसा ||
नहीं चाहिए
पैसा ||
हमेशा-हमेशा ||
जरुर देंखें ये खून के कतरे -- 
12 जुलाई 2011 को 25 वाँ मुर्गा कटेगा