चाचा चालें चल चुके, चौपट चम्प-गुलाब |
शालीमार-निशात सब, धूल-धूसरित ख़्वाब ||
चारों दिशा उदास हैं, फैला है आतंक |
जिम्मेदारी कौन ले, मारे शासन डंक ||
भ्रष्टाचार
भूमंडलीय फिनोमिना (1983 )
माता के व्यक्तव्य से, बाढ़ा हर दिन लोभ |
भ्रष्टाचारी देव को, चढ़ा रहे नित भोग ||
पानी ढोने का करे, जो बन्दा व्यापार |
मुई प्यास कैसे भला, सकती उसको मार ||
काजल की हो कोठरी, कालिख से बच जाय |
हो कोई अपवाद गर , तो उपाय बतलाय ||
मिस्टर क्लीन (1989)
माता के उपदेश को , भूले मिस्टर क्लीन,
राज हमारा बनेगा , भ्रष्टाचार विहीन |
भ्रष्टाचार विहीन, नहीं मैं माँ का बेटा,
भ्रष्टाचार विहीन, नहीं मैं माँ का बेटा,
सारे दागी लोग , अगरचे नहीं लपेटा |
पर"रविकर"आदर्श, बड़ा वो चले दिखाने |
दागै लागे तोप, उन्हीं पर कई सयाने ||
