Saturday, 18 June 2011

कश्मीर (1947)

चाचा  चालें चल  चुके, चौपट  चम्प-गुलाब |
शालीमार-निशात सब, धूल-धूसरित ख़्वाब ||

चारों  दिशा  उदास  हैं,  फैला  है आतंक |
जिम्मेदारी कौन ले,   मारे  शासन  डंक ||

                 भ्रष्टाचार 
         भूमंडलीय फिनोमिना (1983 )

माता  के  व्यक्तव्य से,  बाढ़ा हर दिन लोभ |
भ्रष्टाचारी  देव  को,   चढ़ा  रहे  नित   भोग  ||

पानी  ढोने का    करे,  जो बन्दा  व्यापार  |
मुई प्यास कैसे भला, सकती उसको मार ||

काजल की हो कोठरी, कालिख से बच जाय |
हो  कोई  अपवाद  गर , तो उपाय बतलाय    || 

             मिस्टर क्लीन (1989)
माता के उपदेश को , भूले मिस्टर क्लीन,
राज    हमारा   बनेगा ,  भ्रष्टाचार विहीन |
भ्रष्टाचार   विहीन,  नहीं  मैं  माँ  का बेटा,
सारे  दागी  लोग ,  अगरचे   नहीं  लपेटा |
पर"रविकर"आदर्श, बड़ा वो चले दिखाने |
दागै लागे तोप,  उन्हीं  पर  कई  सयाने  ||

Wednesday, 15 June 2011

रक्त-कोष की पहरेदारी

चालबाज, ठग, धूर्तराज   सब,   पकडे   बैठे   डाली - डाली |
आज बाज को काज मिला जो करता चिड़ियों की रखवाली |

दुग्ध-केंद्र मे धामिन ने जब, सब गायों पर छान्द लगाया |
मगरमच्छ ने  अपनी हद में,  मत्स्य-केंद्र  मंजूर  कराया ||            

महाघुटाले - बाजों   ने   ली,  जब तिहाड़ की जिम्मेदारी |
जल्लादों ने झपटी झट  से, मठ-महन्त की कुल मुख्तारी||

तिलचट्टों ने तेल कुओं पर, अपनी कुत्सित नजर गढ़ाई |
तो रक्त-कोष  की  पहरेदारी,  नर-पिशाच के जिम्मे  आई ||

छोड़ के अपने गाँव

Friday, 10 June 2011

माथे से अब खून बहेगा

कोठर  में  सोई  गौरैया ,   मार  झपट्टा  बाज  उठाये |
बिन प्रतिरोध सभी चूजों को , वो अपना आहार बनाए ||
पाण्डव  के  बच्चे  सोये  थे,  अश्वस्थामा  महाकुकर्मी  |
गला रेत कर, बहुतै खुश हो, दुर्योधन को खबर सुनाये ||

उस भारत की दुखती घटना, नव-भारत फिर से दोहराए
राम की लीला से घबरा कर, आत्मघात हित कदम उठाये | 
पागल सा भटकेगा शापित, जन्म से शोभित मणि छिनाये--
सदा  खून   माथे   से   बहता,  अश्वस्थामा  नजर  चुराए  ||

 

Wednesday, 8 June 2011

पहचानो लोकतंत्र के कातिलों को

उन  दरख्तों  के  बगल  में  खून  के  छींटे  दिखे |
तख्तियों पर  कातिलों  के  नाम  यूँ  पाए  लिखे ||

गुरुमुखी में था लिखा "भलभेचना" पढ़कर लगा |
पहचानता मकतूल होगा, था कोई उसका सगा ||

पास  काले  कोट  सा  गाउन  पड़ा  था  घास  पर |
खून-कीचड़ में सना था, "सिलवटें-बल" तर-बतर ||

गोल त्रिभुज और डब्ल्यू सी  दिखी इक वर्ण-माला |
भारी तबाही थी मचाई, जुड़ गया अध्याय काला ||
 
जो उधर  जिन्दा  बचे,  उनका यही पैगाम है --
संघर्ष  का आगाज  होवे,  राष्ट्र-हित  अंजाम  है ||  
 

Monday, 6 June 2011

बहुतै लगा, देश को चून

             (1)
कांग्रेसी --
तिगनी का नाच नचायें तो 
पूरा देश  बेबस नाचें ||
जब राजघाट पर---
राष्ट्र-भक्ति की धुन पर सुषमा नाचीं
तो कांग्रेसी प्रवचन बाँचें  ||
                     (2)
हर एक्शन का प्रति रिएक्शन 
                  "न्यूटन" का नेचुरल कानून 
सुधरो चाहे नरक सिधारो 
                   बहुतै लगा, देश को चून   
                   
                           (3) 
हिटलर ने वाहिनी बनाई थी कुत्तों की |
करे पुलिस में, कई देश कुत्तों की भरती ||
भारत लेकिन बहुत अनोखा देश लगा---
अलग से कुत्तों की भर्ती की नहीं जरुरत ||
                            (4)
जज    ने  पूछा   एक   चोर   से   बोलो भाई--
चोरी    जैसा   काम    अकेले   क्यों  करते हो ??
बेशर्मी   से   हंसकर  बोला --  सुनिए सर  !
दुनिया से विश्वास आजकल उठा समझकर  ||
                  

Friday, 3 June 2011

प्राइवेट शिक्षक ??

भूमि-बन्दन कर,  धरा पर-- पैर धरता  है  | 

हस्त-दर्शन कर, निबटकर--सैर करता है || 

फिर नहाके  पाठकर, बासी चपाती से    

न्यूज-ताज़ी को निगलते,  पेट भरता है ||


जद्दोजहद से बेखबर जब किस्मत सोती है
बेहतरी  की  कोशिशें,  नाकाम  होती  है  ||

खर्च घर का चल रहा सम्पूर्ण, वेतन से
कुछ कमाई और करता रोज टयूशन से ||

खर्च मुश्किल से ही  पूरे,  पूरे मास का
दाग रक्खे दूर  लेकिन अपने दामन से ||

कड़ी मेहनत 'रविकर' सुबहो-शाम होती   है
बेहतरी की कोशिशें,  नाकाम  होती  है  || 

Wednesday, 1 June 2011

शालिनी कौशिक के आलेख

Ravikar ने कहा…
मन्त्री  से  सन्तरी  बड़े,  इन के   लागौ  गोड़ 
काम बनावें चुटुक से, नीति-नियम को तोड़,
नीति नियम को तोड़, राडिया नीरा जादौ
कर देव  चवन्नी खर्च , करोड़ों सौदे साधौ
है  "रविकर" अंधियार, कनी मनमौजी राजा 
बड़ी देर  से बजा, देश का मारू बाजा  
भ्रष्टाचार का वास्तविक दोषी कौन? 

भारतीय ब्लॉग लेखक मंच पर आज महाभारत -२ के परिणाम घोषित किये गए हैं और घोषित परिणामों के अनुसार  शालिनी कौशिक के निम्न आलेख को तीसरा  स्थान प्राप्त हुआ है-


       करप्शन कप का जारी खेल,पैसे की है रेलमपेल,
कलमाड़ी के चौके तो ए-राजा के छक्के,सब हैं हक्के-बक्के,
बना कर गोल्ड नीरा यादव हो गयी क्लीन-बोल्ड,
नीरा राडिया की फील्डिंग,और वर्मा-भनोट की इनिंग,
सी.बी.आई ने लपके कुछ कैच,
हसन अली मैन ऑफ़ द मैच ,
आदर्श वालों की बैटिंग,
बक अप जीतना है वर्ल्ड करप्शन कप.