| कैसे वह आईने में देख पायेंगे खुद को ?
प्रवीण शाह
गोड़े उर्वर खेत को, काटे सज्जन वृन्द ।
इसके क्रिया-कलाप है, जमींदार मानिन्द ।
जमींदार मानिन्द , सताता रहे रियाया ।
मुजरिम देख दबंग, सामने जा रिरियाया ।
देख काल आपात, कमांडर तनहा छोड़े ।
लेकर भागे जान, पुलिस में भरे भगोड़े ॥ |
सदा
अंग विकल लंगड़ाय, काम ना करता माथा | पद मद में मगरूर, नकारे स्नेहिल गाथा | नीति नियम शुभ रीति, देखकर आँखें मूंदे | इष्ट मित्र परिवार, बहा लें दो दो बूंदे- |
चली तिरंगे पर लटक, दल बल सहित विचित्र ।
दल बल सहित विचित्र, हरा से भगवा हारे ।
मिटता लाल निशान, करे तृण-मूल किनारे ।
रंग रूप हैं भिन्न, खिन्न है सभी कबीले ।
धानी पीला-श्वेत, बैगनी काले नीले ॥ |
हैप्पी बर्थड़े ... अम्मा !!
शिवम् मिश्रा
दादी को शुभकामना, कार्तिक का अंदाज |
प्यारा प्यारा पौत्र दे, गोदी रहा विराज |
गोदी रहा विराज, नाज करता दादी पर |
मिला पिता विद्वान, शुक्रिया का यह अवसर |
हों बुजुर्ग खुशहाल, सही सेहत आजादी |
रविकर करे प्रणाम, खिलाये कार्तिक दादी ||
शापित सुनारप्रतुल वशिष्ठ
॥ दर्शन-प्राशन ॥
विषयी वतसादन वेश धरे विषठा भख भीषण रूप धरे । हतवीर्य हरे हथियाय हठात हताहत हेय कुकर्म करे । सुकुमारि सकारण युद्ध लड़े विषपुच्छन को बहुतै अखरे । मनसा कर निष्फल दुष्टन की मन सज्जन में शुभ जोश भरे । |
....बोझ
Saras
पोसा जाता इत अहम्, उत एक्स्ट्रा की चाह |
अपने अपने कर्म पर, रखते युगल निगाह |
रखते युगल निगाह, घरेलू जिम्मेदारी |
मिलकर लेते बाँट, नहीं कोई आभारी |
बढती जाए आयु, बढे कुछ अधिक भरोसा |
ह्यूमर होता शून्य, अहम् दोनों ने पोसा ||
नफरत की सौदागरी नफ़रत की सौदागरी, कर *सौनिक व्यापार | ना हर्रे ना फिटकरी, आये रक्त बहार | आये रक्त बहार, लोथड़े भी बिक जाएँ | मस्जिद मठ बाजार, जहाँ मर्जी मरवायें | कर लो बम विस्फोट, शान्ति दुनिया को अखरत | हथियारों की होड़, भरे यारों में नफरत || *मांस बेंचने वाला / बहेलिया |
