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Wednesday, 17 April 2013

धमाचौकड़ी धमाके, माँ के बाँके लाल-

ब्लास्ट का पोलिटिकल दुःख


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ठोको कील शकील के, बके बयान कमाल-

धमाचौकड़ी धमाके, माँ के बाँके लाल । 
ठोको कील शकील के, बके बयान कमाल । 

बके बयान कमाल, माल से वोट कमाओ । 
धरा खून से लाल, लाल पी एम् बनवाओ । 

समझौता नक्सली, दोस्त आतंकी आओ । 
मारो पब्लिक धूर्त, दुबारा चलो जिताओ ॥ 

अदावत अदा लत लताड़ : सत्य-कथा-1

मुखड़े बड़े प्रसन्न थे, उत्फुल्लित थे गात । 
नई कार का आगमन,  आखिर हुआ प्रभात । 
आखिर हुआ प्रभात, मगन-मन बच्चे चढ़ते । 
लेकिन सिर मुड़वात, तड़ातड़ ओले पड़ते । 
बच्चों की क्या बात,  मातु बच्चों की उखड़े । 
देखा लहूलुहान, लाल उन सबके मुखड़े ।

8 comments:

  1. आपका यह प्रयास सराहनीय है ....
    सादर

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  2. एक त ससुरे के इज्जत देई जात है ...
    धरा खून से लाल, लाल पी एम् बनवाओ ।

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  3. shakeel ahamad ka dimaag blast kar gaya hai

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  4. बहुत उम्दा प्रस्तुति ,,,रविकर जी,,
    RECENT POST : प्यार में दर्द है,

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  5. सुंदर प्रस्तुति !

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