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Friday, 25 August 2017

जंगली पॉलिटिक्स

सरासर झूठ सुन उसका उसे कौआ नहीं काटा।
चपाती बिल्लियों को चंट बंदर ठीक से बाँटा।

परस्पर लोमड़ी बगुला निभाते मेजबानी जब।
घड़े में खीर यह खाया उधर वह थाल भी चाटा।

युगों से साथ गेंहूँ के सदा पिसता रहा जो घुन 
बनाया दोस्त चावल को नहीं जिसका बने आटा।।

मरा हीरा कटा मोती किसानों की बिकी खेती
खिला पीजा खिला बर्गर भरे फिर कार फर्राटा।

कभी खरगोश कछुवे को नहीं कमजोर समझा था
करा के मैच फिक्सिंग वो करेगा पूर्ण फिर घाटा।।

कुएं तक सिंह तो आया मगर झांका नही अन्दर
बुला खरगोश को रविकर अकेले में बहुत डाटा।।

Monday, 12 November 2012

होते गये तिहाड़ी मंत्री, सत्ता मगर बचा ले कोई- संशोधन के बाद

देह देहरी देहरे, दो, दो दिया जलाय-रविकर


Ganesh

 शुभकामनायें 

दीपावली 2012

Lakshmi
बोला न , 
सीख रहा हूँ गजल ।
बताइये, 
दिशा सही है या नहीं  -



पुरानी रचना -

 13 September 2011

आलू यहाँ उबाले कोई  |
बना पराठा खा ले कोई ||


तोला-तोला ताक तोलते,
सोणी देख भगा ले कोई ||


जला दूध का छाछ फूंकता
छाछे जीभ जला ले कोई ||


जमा शौक से  करे खजाना
आकर  उसे  चुरा ले कोई ||


लेता  देता  हुआ  तिहाड़ी
पर सरकार बचा ले कोई ||


रविकर कलम घसीटे नियमित
आजा प्यारे गा ले कोई ||
14 मास बाद संशोधन 
     22 12 122 22 


    आलू यहाँ उबाले कोई  |
      खाये बना पराठे कोई ||

    ताका-तका तकाते तो थे-
    सोणी हटुक भगाले कोई |

    दूधक जला फुंकाए छाछो 
      जल से गला जलाले कोई |

    करता जमा खजाना हीरो -
    आकर उसे  चुरा ले कोई ||

      होते गये तिहाड़ी मंत्री   
      सत्ता मगर बचा ले कोई ||

      रविकर कलम घसीटे नियमित
    गुनगुन गुना गुना ले कोई ||