Monday, 18 July 2016
पड़ा तरुण तब बोल, अलग रहिये अब पापा-
पापा सब कुछ जानते, वे तो हैं विद्वान।
बच्चा बच्चों से कहे, मेरे पिता महान ।
मेरे पिता महान, शान में पढ़े कसीदे।
कहता किन्तु किशोर, ध्वस्त जब हो उम्मीदें।
कम व्यवहारिक ज्ञान, किया चिड़चिड़ा बुढ़ापा।
पड़ा तरुण तब बोल, अलग रहिये अब पापा।।
Tuesday, 12 July 2016
रविकर जैसे शेर को, कुत्ते भी लें घेर-
पानी ढोने का करे, जो बन्दा व्यापार |
मुई प्यास कैसे भला, उसे सकेगी मार ||
प्रगति-पंख को नोचता, भ्रष्टाचारी-बाज |
लेना-देना कर रहा, फिर भी सभ्य-समाज ||
मोटी-चमड़ी में करें, खटमल जब भी छेद |
तड़प तड़प के झट मरे, पी के खून-सफ़ेद ||
गुण-अवगुण की खान तन, मन संवेदनशील ।
इसीलिए इंसान हूँ, रविकर मस्त दलील ||
समय समय की बात है, समय समय का फेर |
रविकर जैसे शेर को, कुत्ते भी लें घेर ||
शादी की तीसवीं वर्षगाँठ
दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर
1 घंटा
·
बत्ती सी कौंधी सुबह, जब देखी यह टैग।
गई खुमारी सब उतर, आधा दर्जन पैग।
आधा दर्जन पैग, मुबारक वर्षगाँठ हो।
तीस साल व्यतीत, हमारे और ठाठ हों।
रहो स्वस्थ सानन्द, लगे कुछ यहाँ कमी सी।
...
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Manu Gupta
,
Swasti Medha
और
2 अन्य लोग
के साथ.
1 घंटा
·
We wish you a very Happy Anniversary Papa (दिनेश चन्द्र गुप्ता) n Mummy (
Seema Gupta
)
:-)
Wednesday, 6 July 2016
करो गलत नित सिद्ध, लगी लत कैसे जाती
झुकते झुकते झुक गयी, कमर सहित यह रीढ़ |
मुश्किल से रिश्ता बचा, बची तुम्हारी ईढ़ |
बची तुम्हारी ईढ़, तभी भरदिन गुर्राती |
करो गलत नित सिद्ध, लगी लत कैसे जाती |
रविकर सही तथापि, सही हर झिड़की रुक रुक।
मलती फिर तुम हाथ, जिया जब सम्मुख झुक झुक।।
Sunday, 3 July 2016
सत्ता री मत बैठ तू, सत्तारी हर वक्त
सत्ता री मत बैठ तू, सत्तारी हर वक्त |
जन-गण-मन मरता दिखा, रोक बहाना रक्त |
रोक बहाना रक्त, खोज मत नया-बहाना |
दुष्ट सजा ना पाय, शुरू कर फौज सजाना |
सत्तावन सी क्रान्ति, करे जन-मन तैयारी |
शेष बची ना भ्रान्ति, बैठ मत अब सत्तारी ||
Wednesday, 29 June 2016
मुसीबत खड़ी सामने हो कभी
मुसीबत खड़ी सामने हो कभी,
कौन जाता वहाँ से यही देखिये |
बड़ा मतलबी है हमारा शहर
कौन रुकता वहाँ पर नहीं देखिये |
डटो सामने तुम करो सामना
जो साधन वहाँ पर वही देखिये |
मिलेगी विजय और पहचान होगी
गलत देखिये कुछ सही देखिये ||
Wednesday, 8 June 2016
मैं माँ का अनमोल खिलौना
मैं माँ का अनमोल खिलौना ।
नन्हा मुन्हा प्यारा छौना ।
थपकी दे माथा सहलाती
लोरी गाती दूध पिलाती
हरदिन अपने पास सुलाती |
सूखे में सरकाती जाती -
भीगा माँ का रहे बिछौना ।
मैं माँ का अनमोल खिलौना ।।
असमय जागा असमय रोया |
असमय माँ का बदन भिगोया |
मालिस करके वह नहलाती |
इक पुकार पे दौड़ी आती |
माँ की राह ताकता रहता
जब तक था मैं आधा-पौना |
मैं माँ का अनमोल खिलौना ।।
बिना बताये बाहर जाता |
बड़े बहाने रहा बनाता |
जब पापा को गुस्सा आता |
तुरत बचाने आती माता |
करवा देती शादी-गौना |
मैं माँ का अनमोल खिलौना ।।
पोते पोती पाती माता |
उनसे मन बहलाती माता |
बार बार जब खाँसी माता |
हुई बहू से बाती-बाता |
रविकर तब हो जाता बौना ||
मैं माँ का अनमोल खिलौना ।।
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