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Friday, 15 November 2013

मँहगाई की मार से, बेहतर तू ही मार -



सूर्य-चन्द्र सम शंख यह, बसे वरुण मध्यांग |
ब्रम्हा बैठे पृष्ठ पर, अग्र सरस्वति-गंग | 

अग्र सरस्वति-गंग, विराजे रविकर वाणी |
जाय जीत हर जंग, निकलती धुनि कल्याणी |

पाये चौदह रत्न, रत्न यह हर हर बम बम |
ब्रम्हा विष्णु महेश, भगवती सूर्य चन्द्र सम || 

होती जिनसे चूक है, कहते उन्हें उलूक |
असत्यमेव लभते सदा, यदा कदा हो चूक |
यदा कदा हो चूक, मूक रह कर के लूटो |
कह रविकर दो टूक, लूट के झटपट फूटो |
बोलो सतत असत्य, डूब के खोजो मोती |
व्यवहारिक यह कथ्य, सदा जय इससे होती ||









भूला रोटी प्याज भी, अब मिलती ना भीख |
नमक चाट कर जी रहे, ले तू भी ले चीख |

ले तू भी ले चीख, चीख पटना में सुनकर |
हुआ खफा गुजरात, हमें लगता है रविकर |

राहुल बाँटे अन्न, सकल जनतंत्र कबूला |
मोदी छीने स्वाद, नमक भिजवाना भूला ||

सचिन! एक चिट्ठी तुम्हारे लिये....

Ankur Jain 







बहा नाक से खून पर, जमा पाक में धाक |
चौबिस वर्षों तक जमा, रहा जमाना ताक |

रहा जमाना ताक, टेस्ट दो सौ कर पूरे |
कर दे ऊँची नाक, बहा ना अश्रु जमूरे |

चला मदारी श्रेष्ठ, दिखाके करतब नाना |
ले लेता संन्यास, उम्र का करे बहाना |। 

वानखेड़े में राहुल

Bamulahija dot Com 






(1) हुल्लड़ बाजी हो रही, राहुल रहे विराज |
सचिन हुवे आउट चलो, रैली में ले आज |

रैली में ले आज, बैट का देखें जलवा |
राज्य सभा का कर्ज, इधर मोदी भौकलवा |

मोदी मोदी शोर, भीड़ कर बैठी फाउल |
मौका अपना ताड़, भाग लेते हैं राहुल ||

(2)
चौका या छक्का नहीं, बड़ा देश परिवार |
मौका पा धक्का लगा, कर दे बेड़ा पार |

कर दे बेड़ा पार, वानखेड़े की गोदी |
अनायास ही शोर, हो रहा मोदी मोदी |

पूरे दो सौ टेस्ट, ऐतिहासिक था मौका |

सचिन नहीं वह और, लगाया जिसने चौका ||

प्रशस्ति-गान...

Amrita Tanmay 

व्यापारिक वह धूर्तता, इधर मूर्खता शुद्ध |
महिमामंडित होय जग, जीत-जीत हर युद्ध |

जीत-जीत हर युद्ध , अहिंसा पूज बुद्ध की |
हुवे टिकट कुल ब्लैक, फैंस को बोर्ड क्रुद्ध की |

सचिन बहुत आभार, लगे रविकर अपनापा |
कृपा ईश की पाय, आज कण कण में व्यापा |

कार्टून:- आओ कबाड़ी, आओ.

ना ही शिक्षक हूँ अमे, ना ही कोई चोर |
बड़ा समीक्षक समझ ले, लाया बुक्स बटोर |

लाया बुक्स बटोर, नए पैदा कवि लेखक  |
नई पौध का जोर, कहाँ तक चखता बक बक |

देते पुस्तक भेज, दक्षिणा नहिं मनचाही |
इनसे रहा वसूल, कहाँ है बोल मनाहीं -









सात समंदर पार, चली रविकर अधमाई-


पाई नाव चुनाव से, खर्चे पूरे दाम |
लूटो सुबहो-शाम अब, बिन सुबहा नितराम |
बिन सुबहा नितराम, वसूली पूरी करके |
करके काम-तमाम, खजाना पूरा भरके |
सात समंदर पार, चली रविकर अधमाई |
थाम नाव पतवार,  जमा कर पाई पाई  ||

लाज लूटने की सजा, फाँसी कारावास |
देश लूटने पर मगर,  दंड नहीं कुछ ख़ास |
दंड नहीं कुछ ख़ास, व्यवस्था दीर्घ-सूत्रता |
विधि-विधान का नाश, लोक का भाग्य फूटता । 
बेचारा यह देश, लगा अब धैर्य छूटने । 
भोगे जन-गण क्लेश, लगे सब लाज लूटने ॥ 

6 comments:

  1. आदरणीय सर , बढ़िया सूत्र , धन्यवाद
    " जै श्री हरि: "

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  2. राहुल बाँटे अन्न, सकल जनतंत्र कबूला |
    मोदी छीने स्वाद, नमक भिजवाना भूला ||
    सुन्दर !

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  3. राहुल बाँटे अन्न, सकल जनतंत्र कबूला |
    मोदी छीने स्वाद, नमक भिजवाना भूला ||

    सटीक प्रासंगिक

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज रविवार (17-11-2013) को "लख बधाईयाँ" (चर्चा मंचःअंक-1432) पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    गुरू नानक जयन्ती, कार्तिक पूर्णिमा (गंगास्नान) की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  5. मँहगाई की मार से, बेहतर तू ही मार -

    ये क्या नमक फांकेगा ?
    Bamulahija dot Com
    Cartoon, Hindi Cartoon, Indian Cartoon, Cartoon on Indian Politcs: BAMULAHIJA









    भूला रोटी प्याज भी, अब मिलती ना भीख |
    नमक चाट कर जी रहे, ले तू भी ले चीख |

    ले तू भी ले चीख, चीख पटना में सुनकर |
    हुआ खफा गुजरात, हमें लगता है रविकर |

    राहुल बाँटे अन्न, सकल जनतंत्र कबूला |
    मोदी छीने स्वाद, नमक भिजवाना भूला ||


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