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Tuesday, 5 November 2013

बढ़े हिन्द की शान, बधाई श्री हरिकोटा -


 संघ परिवार और सांप्रदायिक दंगे -भाग2

लो क सं घ र्ष !


खीरा-ककड़ी सा चखें, हम गोली बारूद |

पचा नहीं पटना सका, पर अपने अमरूद |

पर अपने अमरूद, जतन से पेड़ लगाये |
लिया पाक से बीज, खाद ढाका से लाये |

बिछा पड़ा बारूद, उसी पर बैठ कबीरा |
बने नीति का ईश, जमा कर रखे जखीरा ||
नक्सल आतंकी कहीं, फिर ना जायें कोप |
शान्ति-भंग रैली करे, सत्ता का आरोप |

सत्ता का आरोप, निभाता नातेदारी |
विस्फोटक पर बैठ, मस्त सरकार बिहारी |

दशकों का अभ्यास, सँभाले रक्खा भटकल |
रैली से आतंक, इलेक्शन से हैं नक्सल ||



कम्युनल नेहरू कहें, जब निजाम-संताप |
रिश्ते में लगने लगे, लौह-पुरुष तब बाप |

लौह-पुरुष तब बाप, आज अडवाणी बोले |
कांग्रेसी खुरपेंच, विरासत खा हिचकोले |

छद्म धर्म निरपेक्ष, वसूले अब भी किश्तें |
लेकिन आज पटेल, संघ के लिए फ़रिश्ते ||


जलने से बच जाय तो, बन सकती है सास |
सास इसी एहसास से, देती साँस तराश |

देती साँस तराश, जलजला घर में आये |
और होय परिहास, जगत में नाक कटाये |

रविकर घर से निकल, चला है कालिख मलने |
लेकिन घर में स्वयं, बहू को देता जलने-


अरसीला अरविन्द *अर, अथ शीला सरकार | 
दृष्टि-बुरी जब कमल पर, होगा बंटाधार |

होगा बंटाधार, खेल फिर झारखण्ड सा |
जन त्रिशंकु आदेश, खेल खेलेगा पैसा |

बाढ़े भ्रष्टाचार, प्रशासन फिर से ढीला |
कीचड़ में अरविन्द, कहाँ शीला-अर सीला |
अर = जिद 
सीला =गीला / सीलन 
अरसीला = आलसी 

TUESDAY, 30 JULY 2013

खिलें इसी में कमल, आँख का पानी, कीचड़


कीचड़ कितना चिपचिपा, चिपके चिपके चक्षु |
चर्म-चक्षु से गाय भी, दीखे उन्हें तरक्षु |

दीखे जिन्हें तरक्षु, व्यर्थ का भय फैलाता |
बने धर्म निरपेक्ष, धर्म की खाता-गाता |

कर ले कीचड़ साफ़,  अन्यथा पापी-लीचड़ |
खिलें इसी में कमल, आँख का पानी, कीचड़ |
चर्म-चक्षु=स्थूल दृष्टि
तरक्षु=लकडबग्घा

सवाल आपकी सेहत के ज़वाब माहिरों के (चौथी क़िस्त ) प्रश्न :क्या है आँख -दुखनी आने का मतलब ?

Virendra Kumar Sharma




आँखों से आंसू बहे, जाँय किनारे सूज |
उतरे लाली लाल के, दृष्टि होय फिर फ्यूज |

दृष्टि होय फिर फ्यूज, एलर्जी धूप रसायन |
पक्का छुतहा रोग, छोड़ सामूहिक गायन |

रविकर चश्मा पहन, नहीं रह दवा भरोसे |
नहीं लड़ाना आँख, बंधुवर इन आँखों से ||


DHAROHAR अभिषेक मिश्र

मंगल मंगलवार है, उड़ता मंगल-यान |
मंगल मंगल कामना, बढ़े हिन्द की शान |

बढ़े हिन्द की शान, बधाई श्री हरिकोटा |
मंगल मंगल लाल, लाल हनुमान लंगोटा |

कह रविकर कविराय, लक्ष्य-हित बढ़ता पलपल |
मनोवांछित पाय, सफल हो अपना मंगल ||

"हमने छन्दों को अपनाया" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक 








करे खटीमा में सदा, पुण्य-धार्मिक कार्य |
साहित्यिक परिवार यह, करे सकल उपचार |

करे सकल उपचार, भौतिकी दैहिक दैविक |
कृपा बनाये रखे, सदा हे रविकर मालिक |

रहे सुखी-सम्पन्न, बाँध ना पावे सीमा |
रहे कर्मरत सतत, याद नित करे खटीमा ||

5 comments:

  1. कुण्डलियाँ में टिप्पणियाँ।
    बहुत खूब।
    आभार।

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  2. मंगल मंगलवार है, उड़ता मंगल-यान |
    मंगल मंगल कामना, बढ़े हिन्द की शान |

    बढ़े हिन्द की शान, बधाई श्री हरिकोटा |
    मंगल मंगल लाल, लाल हनुमान लंगोटा |

    कह रविकर कविराय, लक्ष्य-हित बढ़ता पलपल |
    मनोवांछित पाय, सफल हो अपना मंगल ||

    एक से बढ़के एक आपने सेतु सँवारे ,

    कुंडलियों के वस्त्र सभी ने यकसां धारे .

    बहुत सुन्दर काव्यात्मक रूपांतरण किया है आपने .लगभग सभी सेतु हैम पढ़ चुके हैं .

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  3. अंदाजे रविकर है
    और है कुछ और :)

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बृहस्पतिवार (07-11-2013) को "दिमाग का फ्यूज़" (चर्चा मंच 1422) पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!

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