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Sunday, 24 November 2013

इक सज्जन ले ढूँढ , देश जो रखे बचाकर



"तेजपाल का तेज" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक 





मिटटी करे पलीद अब, यही तरुण का तेज |
गलत ख्याल वो पाल के, छोड़े अपनी मेज |

छोड़े अपनी मेज, झुकाई कीर्ति पताका |
करता नहीं गुरेज, बना फिरता है आका |

करती महिला केस, हुई गुम सिट्टी पिट्टी |
सोमा ज्यादा तेज,  दोष पर डाले मिटटी ||

विचारों की कब्र पर मूर्तियों की होड़

Akhileshwar Pandey 

चाकर चोर असंत ठग, दंद-फंद आबाद |
सदविचार दफना दिए, फिर भी मिलती दाद |

फिर भी मिलती दाद, यही उस्ताद अनोखे |
हर्रे ना फिटकरी, रंग लाते है चोखे |

जमा कई सरदार, देख घबराये रविकर |
इक सज्जन ले ढूँढ , देश जो रखे बचाकर ||




 

रंग धर्म क्षेत्रीयता, पद मद के दुष्कृत्य

कुंडलियां 

(१)

मानव समता पर लगे, प्रश्न चिन्ह सौ नित्य ।
 रंग धर्म क्षेत्रीयता, पद मद के दुष्कृत्य । 

पद मद के दुष्कृत्य , श्रमिक रानी में अंतर । 
प्राण तत्व जब एक, दिखें क्यूँ भेद भयंकर ।

रविकर चींटी देख, कभी ना बनती दानव । 
रखे परस्पर ख्याल, सीख ले इनसे मानव ॥ 


दो मंत्रालय दो बना, रेप और आतंक |


दो मंत्रालय दो बना, रेप और आतंक |  
निबट सके जो ठीक से, राजा हो या रंक |

राजा हो या रंक, बढ़ी कितनी घटनाएं-
जब तब मारे डंक, इन्हें जल्दी निबटाएं |

तंतु तंतु में *तोड़, बड़े संकट में तन्त्रा |
कैसे रक्षण होय, देव कुछ दे दो मन्त्रा -





प्राण तत्व जब एक, दिखें क्यूँ भेद भयंकर-


शुभ बुद्धि विवेक मिले जब से, सब से खुद को मनु श्रेष्ठ कहे  ।

पर यौनि अनेक बसे धरती, शुभ-नीति सदा मजबूत गहे । 

कुछ जीव दिखे अति श्रेष्ठ हमें, अनुशासन में नित बीस रहे । 

जिनकी अति उच्च समाजिकता, पर मानव के उतपात सहे ॥  


4 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (25-11-2013) को "उपेक्षा का दंश" (चर्चा मंचःअंक-1441) पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. आदरणीय , पाठन योग्य सूत्र व सुन्दर प्रस्तुति , धन्यवाद
    ॥ जै श्री हरि: ॥

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