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Tuesday, 10 December 2013

नकारात्मक गुण छिपा, ले ईमान की आड़ -

  

बावन पत्ते कुछ इधर कुछ उधर हंस रहा है बस एक जोकर

सुशील कुमार जोशी 

पंजे घी में लो डुबा, छक्के-अट्ठे साथ |
छोड़ें रविकर बादशा, जब बेगम का हाथ |

जब बेगम का हाथ, गुलामों ख़्वाब सजाओ |
सैकिल इक्का साज, दुक्कियाँ सैर कराओ |

खुश हैं हाथी-दांत, लगाते चौका गंजे |
सत्ता दे दहलाय, डुबा नहला के पंजे ||  
आपेक्षा अब आप, करो दिल्ली की पूरी-
  
नकारात्मक गुण छिपा, ले ईमान की आड़ । 
व्यवहारिकता की कमी, दुविधा रही बिगाड़ । 

दुविधा रही बिगाड़,  तर्क-अभिव्यक्ति जरुरी । 
आपेक्षा अब आप, करो दिल्ली की पूरी । 

पानी बिजली सहित, प्रशासन स्वच्छ सकारा । 
वायदे करिये पूर, अन्यथा कहूं नकारा ॥  
लेना देना साथ भी, लागे भ्रष्टाचार-
अड़ियल टट्टू आपका, अड़ा-खड़ा मझधार |
लेना देना साथ भी, लागे भ्रष्टाचार |

लागे भ्रष्टाचार, दीखने लगा *अड़ाड़ा |
भाड़ा पूरा पाय, पढ़ाये आज पहाड़ा |

ताके पूरा देश, हमेशा बेहतर दढ़ियल |
टस से मस ना होय, महत्वाकांक्षी अड़ियल ||
*आडम्बर, ढोंग

अपनापन नहिं आपसे, अपने से अपड़ाव |
आप आप की है पड़ी, जाने कहाँ जुड़ाव |

जाने कहाँ जुड़ाव, समर्थन जिनका पाया |
दिखा उन्हीं को दाँव, नहीं सरकार बनाया |

रविकर सपना टूट, शुरू है सतत कलपना |
लगे स्वार्थी आप, तोड़ते वायदा अपना ||

Untitled

ZEAL 
 ZEAL
 पूर तमन्ना हो गई, जीते आप चुनाव |
पर अट्ठाइस सीट से, होता नहीं अघाव |

होता नहीं अघाव, दाँव लम्बा मारेगा |
होगा पुन: चुनाव, आप सब को तारेगा |

आये सत्तर सीट, जुड़ेगा स्वर्णिम पन्ना |
सारी दुनिया साफ़, तभी हो पूर तमन्ना ||

करें इशारा आप, बैठ रेडी मधु-कोड़ा


कोड़ा की दरकार थी, दे कोड़ा फटकार |
आये सब औकात में, झाड़ू का आभार |

झाड़ू का आभार, कमल नैनों में गरदा |
पंजे की दरकार, हटा दे पीला परदा |

नहीं बने सरकार, भानुमति कुनबा जोड़ा |
करें इशारा आप, बैठ रेडी मधु-कोड़ा ||   






3 comments:

  1. सुन्दर प्रस्तुति..आभार..

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  2. भैया अपेक्षा कर लो पूरी देश की दिल्ली की बढ़िया रचना


    नकारात्मक गुण छिपा, ले ईमान की आड़ ।
    व्यवहारिकता की कमी, दुविधा रही बिगाड़ ।

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