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Monday, 9 December 2013

पर अट्ठाइस सीट से, होता नहीं अघाव-


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ZEAL 
 ZEAL
 पूर तमन्ना हो गई, जीते आप चुनाव |
पर अट्ठाइस सीट से, होता नहीं अघाव |

होता नहीं अघाव, दाँव लम्बा मारेगा |
होगा पुन: चुनाव, आप सब को तारेगा |

आये सत्तर सीट, जुड़ेगा स्वर्णिम पन्ना |
सारी दुनिया साफ़, तभी हो पूर तमन्ना ||


अन्ना को अफ़सोस है, झाड़ू रहा अपूर्ण-

अन्ना को अफ़सोस है, झाड़ू रहा अपूर्ण |
कृत्य उन्हीं का है सखे, मनसा करते चूर्ण |

मनसा करते चूर्ण , नहीं तो बहुमत आता |
प्यारा केजरिवाल, सही सरकार बनाता |

दिल्लीवासी झूल, रहो लेकिन चौकन्ना |
दुहराना मत भूल, त्रिशंकु करते जो अन्ना ||




काजी तो सठिया गया, कहे उच्चतम सृंग-

अपने बस में अब नहीं, पा'जी गंगू भृंग |

 पा'जी गंगू भृंग, कुसुम कलिकाएँ चूसा |
ना आशा ना तेज, नहीं तो भरता भूसा |

रविकर है निरुपाय, अगर दोनों है राजी |
कलिका सुने पुकार, पुकारे जब भी काजी |


3 comments:


  1. बहुत खूब लिखा है रविकर भाई कांग्रेसी भी मान रहे हैं -झाड़ू से पिटे हैं वह कमल से नहीं। मोदी के जूतों से नहीं अनाम स्थानीय जूतों से पिटे हैं।

    पूर तमन्ना हो गई, जीते आप चुनाव |
    पर अट्ठाइस सीट से, होता नहीं अघाव |

    होता नहीं अघाव, दाँव लम्बा मारेगा |
    होगा पुन: चुनाव, आप सब को तारेगा |

    आये सत्तर सीट, जुड़ेगा स्वर्णिम पन्ना |
    सारी दुनिया साफ़, तभी हो पूर तमन्ना ||

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  2. हमेशा की तरह लाजवाब टिप्पणियाँ !

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  3. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि कि चर्चा कल मंगलवार १०/१२/१३ को चर्चा मंच पर राजेश कुमारी द्वारा की जायेगी आपका वहाँ स्वागत है

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