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Tuesday, 3 December 2013

फँसता तेज अधेड़, छोड़ देता ज्यों सीढ़ी-


59 साल की महिला सीईओ पर लगा यौन शोषण का आरोप, पांच पुरुष कर्मचारियों ने दर्ज कराया केस

chandan bhati 







 ठण्ड कलेजे पै गई, दर्ज हुआ जो केस |
नहीं धुले ये दूध के, जाने देश विदेश |

जाने देश विदेश, बड़ी अलबेली काकी |
किसमे कितना सेक्स, चाल चल जाय बला की |

पाण्डव का आभार, शिकायत जो हैं भेजे |
फँसी शिकंजे नारि, पड़ी इत ठण्ड कलेजे ||

मरने की खातिर पुलिस, रोक सके के क़त्ल-

  




मरने की खातिर पुलिस, रोक सके के क़त्ल |
बनती नीति नितीश की, देखो सी एम् शक्ल |

देखो सी एम् शक्ल, हाथ पर हाथ धरे हैं-
हो हत्या अपहरण, नक्सली घात करे हैं |

नहीं रहा जूँ रेंग, हिलाया नहीं खबर ने |
सी एम् देते छोड़, पुलिस-पब्लिक को मरने || 




सीढ़ी कोने में खड़ी, इधर बड़ी सी लिफ्ट |

लिफ्ट लिफ्ट देती नहीं, सीढ़ी की स्क्रिप्ट |



सीढ़ी की स्क्रिप्ट, कमर में हाथ डालते |

चूमाचाटी होय, तनिक एहसास पालते |


किन्तु लगे ना दोष, तरुण की कैसी पीढ़ी |
फँसता तेज अधेड़, छोड़ देता ज्यों सीढ़ी ||


बाला गर कश्मीर की, कर ले बाहर व्याह |
हक़ खोवे संपत्ति का, धारा बनी गवाह |

धारा बनी गवाह, तीन सौ सत्तर लगती |
अदालती आदेश, सुनंदा पुष्कर जगती |

चर्चा से इंकार, मचाये लोग बवाला |
तब मोदी के साथ, खड़ी कश्मीरी बाला ||   

लिव इन रिलेशनशिप को कानूनन रोका जाये ..

Shalini Kaushik 








चढ़े देह पर *देहला, देहात्मक सिद्धांत |

लेशन लिव-इन-रिलेशनी, जीने के उपरान्त |

जीने के उपरान्त, सोच क्या खोया पाया |
हरदम रहे अशांत, स्वार्थ सुख आगे आया |

त्याग समर्पण छोड़, ओढ़ ले चादर रविकर |
है समाज का कोढ़, वासना चढ़े देह पर ||   
*मद्य  

विकलांग आप है जिन्होंने अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं किया !

जज्बे को सलाम ! 

पी.सी.गोदियाल "परचेत" 

 अंधड़ !

दारुण दिखता दृश्य यह, गायब दोनों हाथ |
पैरों पर स्याही लगे, सत्साहस है साथ |

सत्साहस है साथ, अनोखा वोटर आया |
करता चोखा काम, एक सन्देश सुनाया |

धन्य धन्य विकलांग, देह से दीखे भारु |
लेकिन हैं कुछ लोग, मांगते पहले दारू || 

जमीन की सोच है फिर क्यों बार बार हवाबाजों में फंस जाता है

सुशील कुमार जोशी 

बाज बाज आता नहीं, भरता रहे उड़ान |
नीचे कुछ भाता नहीं, खुद पर बड़ा गुमान |

खुद पर बड़ा गुमान, कहाँ उल्लू में दमखम |
लेता आँखें मीच, धूप की ऐसी चमचम |

पर गुरुत्व सिद्धांत, इक दूजे को खींचे |
रख धरती पर पैर, लौट आ प्यारे नीचे ||




रविकर करता गौर, दाहिने रख पत्नी को-

(1)
पत्नी को भी छूट हो, अलग बिताये पाख |
प्रेमी प्यारा तड़पता, लगी दाँव पर साख |

लगी दाँव पर साख, दाख अब तो नहिं खट्टे |
राम राम इस पाख, श्याम फिर बोले पट्टे |

उपपत्नी का दौर, भाग्य से टूटो छींको |
रविकर करता गौर, दाहिने रख पत्नी को || 

(2)
बामांगी वह थी कभी, अभी दाहिनी ओर | 
दुगुनी दिल की कोठरी, खाली बायाँ छोर |

खाली बायाँ छोर, ख़ुशी का मौसम आया |
भेजा कल पैगाम, उसे भी पास बुलाया |

लेकिन पीटे माथ, हुआ रविकर एकांगी |
घंटा घंटा बाँट, करे टोटे बामांगी ||

10 comments:

  1. सुंदर टिप्पणियाँ सुंदर सूत्र !
    आभार 'जमीन की सोच है फिर क्यों बार बार हवाबाजों में फंस जाता है' को स्थान दिया !

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  2. सुंदर टिप्पणियाँ सुंदर सूत्र !

    shukriya.

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  3. बहुत बढ़िया प्रस्तुति ...

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  4. वाह नान -लिविंग टुगेदर

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  5. बेहतरीन अभिव्यक्ति...!
    ----------------------------------
    Recent post -: वोट से पहले .

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  6. पत्नी को भी छूट हो, अलग बिताये पाख |
    प्रेमी प्यारा तड़पता, लगी दाँव पर साख |

    लगी दाँव पर साख, दाख अब तो नहिं खट्टे |
    राम राम इस पाख, श्याम फिर बोले पट्टे |

    उपपत्नी का दौर, भाग्य से टूटो छींको |
    रविकर करता गौर, दाहिने रख पत्नी को ||

    वामांगी पत्नी हुई ,

    प्रेमिका दक्षिणांग ,

    लम्बी बहुत छलाँग

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  7. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बृहस्पतिवार (05-12-2013) को "जीवन के रंग" चर्चा -1452
    पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  8. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बृहस्पतिवार (05-12-2013) को "जीवन के रंग" चर्चा -1452
    पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  9. बहुत बढियां प्रस्तुति , सुन्दर लिंक्स ..

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  10. अच्छी प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...

    नयी पोस्ट@ग़ज़ल-जा रहा है जिधर बेखबर आदमी

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