Follow by Email

Friday, 2 November 2012

जरा दबा दे पैर, मैया, लगे थकी है -




घर कहीं गुम हो गया





प्यारे प्यारे पूत पे, पिता छिड़कता जान ।
अपने ख़्वाबों को करे, उसपर कुल कुर्बान ।
उसपर कुल कुर्बान, मनाये देव - देवियाँ ।
करे सकल उत्थान, फूलता देख खूबियाँ ।
पुत्र बसा परदेश, वहीँ से शान बघारे ।
पिता हुवे बीमार, और भगवन को प्यारे ।।


समय की पुकार है

कारे कृपण करेज कुछ, काटे सदा बवाल ।
इसीलिए तो बुरे हैं, भारत माँ के हाल ।
भारत माँ के हाल, हाल में घटना देखा ।
चोरों की घट-चाल, रेवड़ी बटना देखा ।
जाओ तनिक सुधर, समय नित यही पुकारे ।
चिंदी चिंदी होय, धरा दुष्टों धिक्कारे ।।
 

“सबसे अच्छी मेरी माता” (अरुणदेव यादव)


माता के चरणों तले, स्वर्ग-लोक का सार ।
 मनोयोग से पूँजिये,  बार बार आभार ।
बार बार आभार, बचुवा बड़ा लकी है ।
जरा दबा दे पैर, मैया, लगे थकी है । 
रविकर का आशीष, ब्लॉग जो भला बनाता ।
रहे सदा तू बीस, कृपा कर भारत माता ।।


"समझ"
My Photo
मरुत मरू देता बना, जल अमरू कर देत ।
मरुद्रुम कांटे त्याग दे, हो अमरूदी खेत ।
हो अमरूदी खेत, देश भी बना बनाना ।
बैठे बन्दर खाँय,  वहां लेकिन मत जाना ।
डालेंगे वे नोच, सभी की मिली भगत है ।
रावण से था युद्ध, सफल वो आज जुगत है ।।

सर्ग-5 : भगवती शांता इति

श्री राम की सहोदरी : भगवती शांता

भाग-1

चंपा-सोम
कई दिनों का सफ़र था, आये चंपा द्वार |
नाविक के विश्राम का, बटुक उठाये भार ||

राज महल शांता गई, माता ली लिपटाय |
मस्तक चूमी प्यार से, लेती रही बलाय ||

तुम्हे पाने की जिद

"अनंत" अरुन शर्मा  
दास्ताँने - दिल (ये दुनिया है दिलवालों की )
बंदिश समझो बन्दगी, इधर उधर मत ताक ।
बहु-तेरे है ताक में, तेरे आशिक-काक ।

तेरे आशिक-काक, रंजिशे रविकर रखते ।

रही उन्हीं की धाक, हमेशा साजिश करते ।

बारिस में मत भीग, मिलेगा उन्हें बहाना ।

मत कर जिद नादिरे, प्यार तेरा है पाना ।।

7 comments:

  1. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete
  2. आदरणीय रविकर ये पंक्तियाँ तो ह्रदय में बस गईं. अति सुन्दर सर वाह क्या बात है. मेरी रचना को स्थान दिया अनेक-2 धन्यवाद
    माता के चरणों तले, स्वर्ग-लोक का सार ।
    मनोयोग से पूँजिये, बार बार आभार ।

    ReplyDelete
  3. आपका टिप्पणी करने का ये अंदाज बहुत भाता है रविकर जी ... आप मानो या ना मानो आपकी टिप्पणी का इंतजार मैं कई दिनों से कर रहा था ... लिंक-लिक्खाड़ पर मेरे ब्लॉग का लिंक आना मेरे लिए सोने पर सुहागा है।

    आपको कोटि कोटि धन्यवाद रविकर जी।

    ReplyDelete
  4. सराहनीय प्रस्तुति आभार

    ReplyDelete
  5. भारत माँ के हाल, हाल में घटना देखा ।
    चोरों की घट-चाल, रेवड़ी बटना देखा ।

    सुंदर पंक्तियाँ,,,,रविकर जी आपने सही कहा,,,,

    ReplyDelete