Sunday, 12 February 2012

नेताओं ने माल, कई पीढ़ी से दाबा

 
बाबा बैठा मंच पर, लेकर बच्चे पाँच ।
कहीं साँच की आँच से, बहता भंगुर काँच ।

बहता भंगुर काँच, कष्ट सदियों से भोगा ।
करिहै कैसे रोग, नीक बाबा का योगा ।

नेताओं ने माल,  कई पीढ़ी से दाबा ।
बच्चा-बच्चा भिन्न, जानते राहुल बाबा ।।

Thursday, 9 February 2012

राज-तंत्र की बेल, ताकता रायबरेली

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राय-बरेली फिर सजे, दिखे नए युवराय ।
नव पीढ़ी जो मंच पर, मम्मी मन हरषाय।

मम्मी मन हरषाय, देख के नाती-नातिन ।
राहुल उम्र-दराज, साल जो बीते छिन-छिन  ।

ख़्वाब व्याह का देख, हारती थककर डेली ।
राज-तंत्र की बेल, बढ़ी इन रायबरेली ।।
 
पाला पोसा शौक से, बढ़ी नहीं जब बेल ।
तब चुनाव के मंच पर, दिखा अनोखा खेल ।

दिखा अनोखा खेल, डोर सत्ता की पकड़े ।
नौनिहाल अल-बेल , खड़े मैया को जकड़े ।

सदियों से परिवार, देश का रविकर आला ।
अगली पीढ़ी ठाढ़, पड़े अब इनसे पाला ।।

Tuesday, 7 February 2012

नौटंकी श्रीमंत, खाय के उगलें रोटी ||

ZEAL पर टिप्पणी
रोटी खाकर यह मुआ, खटिया पर पड़ जाय  |
ज्यों ईंदुर रोटी कुतर, बिल में जाय छुपाए |
बिल में जाय छुपाए, चार दिन बच्चे रोवें |
एक समय का भात, शाम की रोटी खोवें |
वह राखी सावंत, खेलती खोटी गोटी |
नौटंकी श्रीमंत, खाय के उगलें रोटी ||

दिग्भ्रमित ; गुरु-गुरुर को भंग--

मेरी टिप्पणी-राम राम भाई पर

राहुल गांधी और काले झंडे .

अंध-गुरू की मती-मंद, दंद-फंद सह जंग | 
शब्द-कोष में ढूढ़ते, कृष्ण-रंग से दंग |

कृष्ण रंग से दंग, नंग जनता कर देती |
गुरु-गुरुर को भंग, तंग हो झंडा लेती |


जन-मन चंडी-चंड, पंथ-प्रतिबन्ध शुरू की |
  दण्ड करे शत-खंड, सुताई अंध-गुरु की || 


Saturday, 4 February 2012

खूब "घुटा-लो" शीर्ष, खुदा तक चाहे जाओ ।।

घमंडी की मंडी
जाओ जाना है जहाँ, लाओ फंदा नाप ।
मातु विराजे दाहिने, बैठा ऊपर बाप ।

बैठा ऊपर बाप, चित्त का अपने राजा ।
मर्जी मेरी टॉप, बजाऊं स्वामी बाजा ।

उच्च-उच्चतम दौड़, दौड़ कर टाँग बझाओ ।
खूब "घुटा-लो" शीर्ष, खुदा तक चाहे जाओ ।।

Thursday, 2 February 2012

बताइये कौन है ??

चतुर हिम्मती निपुण भट, धुन का वह धौंताल ।
धौंक-धौंक धर धौंजता, धमक स्वर्ग-पाताल ।
धमक स्वर्ग-पाताल, देख लो तीन पाख तक ।
खर्चे लाखों-लाख, राखता गिरों शाख तक ।
यू पी पूछे नाम, ऊंघता कुम्भकरण फिर।
सोवे सालों साल, जगे क्यूँ फिर वो शातिर ??

Sunday, 29 January 2012

तुरत भिडाये जोड़, जान बीबी कस खाए ??

सरोगेट के केस से,  बच्चे लेते सीख ।
पालक धोखे खा रहे, नया ट्रेंड इक दीख ।

नया ट्रेंड इक दीख, टाल शादी का प्रेसर ।
हायर जोड़ीदार,  करें शादी  ठेके  पर ।

टोओबो डट कॉम, चाइना में खुब छाए ।
नया भिड़ाए जोड़, जान बीबी कस खाए ??

Wednesday, 25 January 2012

मेरी टिप्पणी : हुआ यह वोटर भारू ||

बेसुरम 

ठंडी-ठंडी ठंड पर 

बहुत सही है लेखनी, सही बहुत ही ठण्ड |
स्वेटर जैकेट इनर में, उड़ा साल का फंड |

उड़ा साल का फंड, ठण्ड पाकेट में पै गी |
सब नेता बरबंड, नार्थ में जमघट है गी |

कर लो खुब उत्पात, बाँट के पैसा दारु |
महँगाई सह ठण्ड, होय यह वोटर भारू ||