Thursday, 12 December 2013

द्विलिंगी गुट *गेगले, गन्दी करते औनि-


क्या इनमें कोई भी सेलेब्रिटी है ??? ... डा श्याम गुप्त ....





केंचुल कामी का चुवे, धरे केंचुवा यौनि |
द्विलिंगी गुट *गेगले, गन्दी करते औनि |

गन्दी करते औनि, बनाये तन मन रोगी |
पशुचर्या पशु-काम, हुवे हैं पशुवत भोगी |

सरेआम व्यवहार, गेंगटे रविकर गेंदुल |
रख उरोज, पर, दन्त, गेगले छोड़ें केंचुल ||
गेगले=*मूर्ख 
गेंदुल=चमगादड़ 
गेंगटे=केकड़े 

समलैंगिकता और समलैंगिक सम्बन्ध क़ानून का विषय न होकर हमारी सामाजिकता ,नीति शाश्त्र और धर्म सम्मत आचरण से जुड़े विषय हैं

Virendra Kumar Sharma
कुक्कुर के पीछे लगा, कुक्कुर कहाँ दिखाय |
कुतिया भी देखी नहीं, जो कुतिया-मन भाय |

कुतिया के मन भाय, नहीं पाठा को देखा |
पढ़ते उलटा पाठ, बदल कुदरत का लेखा |

पशु से ही कुछ सीख, पाय के विद्या वक्कुर |
गुप्त कर्म रख गुप्त, अन्यथा सीखें कुक्कुर ||

क्या करे कोई गालिब खयाल वो नहीं हैं अब

सुशील कुमार जोशी 

ठुमरी पर ठुमके लगा, ख्याली पके पुलाव |
राम राज्य आने लगा, बस इक और चुनाव |

बस इक और चुनाव, मुसल्लसल बस इमान है |
बे-इमान यह जगत, आप की बढ़ी शान है |

पानी बिजली मुफ्त, मुफ्त में कुरता चुनरी |
मुफ्त मिले आवास, मुफ्त में सुनिये ठुमरी |||

"आप" के पाप

ZEAL 
यह तो पक्की बात है, ले मुस्लिम का साथ । 
खा जाएगा हाथ को, फिर पकडे वह पाथ । 

फिर पकडे वह पाथ, रास्ता वह कम्युनिस्टी । 
मुस्लिम तुष्टिकरण, हिन्दु  प्रति टेढ़ी दृष्टी । 

खतरनाक यह व्यक्ति, हमें तो लगता बक्की । 
बना ढपोरी-शंख, बात है यह तो पक्की ॥  

Wednesday, 11 December 2013

ठुमरी पर ठुमके लगा, ख्याली पके पुलाव-



क्या करे कोई गालिब खयाल वो नहीं हैं अब

सुशील कुमार जोशी 

ठुमरी पर ठुमके लगा, ख्याली पके पुलाव |
राम राज्य आने लगा, बस इक और चुनाव |

बस इक और चुनाव, मुसल्लसल बस इमान है |
बे-इमान यह जगत, आप की बढ़ी शान है |

पानी बिजली मुफ्त, मुफ्त में कुरता चुनरी |
मुफ्त मिले आवास, मुफ्त में सुनिये ठुमरी |||


"आप" के पाप

ZEAL 
यह तो पक्की बात है, ले मुस्लिम का साथ । 
खा जाएगा हाथ को, फिर पकडे वह पाथ । 

फिर पकडे वह पाथ, रास्ता कम्युनिस्टी । 
मुस्लिम तुष्टिकरण, हिन्दु  प्रति टेढ़ी दृष्टी । 

खतरनाक यह व्यक्ति, हमें तो लगता बक्की । 
बना ढपोरी-शंख, बात है यह तो पक्की ॥ 


करिये कुछ तो पूर्ण, समर्थन भी तो आया -
भाया आना आपका, दिल्ली में उत्साह ।
लोकतंत्र को मिल गयी, सीधी सच्ची राह । 

सीधी सच्ची राह, हाथ की खुजली मेटे । 
वायदे किन्तु अनेक, आज भी धरे लपेटे । 

करिये कुछ तो पूर्ण, समर्थन भी तो आया । 
झट-पट सत्ता थाम, आज तक हमें लुभाया ॥ 

आपेक्षा अब आप, करो दिल्ली की पूरी-
  
नकारात्मक गुण छिपा, ले ईमान की आड़ । 
व्यवहारिकता की कमी, दुविधा रही बिगाड़ । 

दुविधा रही बिगाड़,  तर्क-अभिव्यक्ति जरुरी । 
आपेक्षा अब आप, करो दिल्ली की पूरी । 

पानी बिजली सहित, प्रशासन स्वच्छ सकारा । 
वायदे करिये पूर, अन्यथा कहूं नकारा ॥  

लेना देना साथ भी, लागे भ्रष्टाचार-
अड़ियल टट्टू आपका, अड़ा-खड़ा मझधार |
लेना देना साथ भी, लागे भ्रष्टाचार |

लागे भ्रष्टाचार, दीखने लगा *अड़ाड़ा |
भाड़ा पूरा पाय, पढ़ाये आज पहाड़ा |

ताके पूरा देश, हमेशा बेहतर दढ़ियल |
टस से मस ना होय, महत्वाकांक्षी अड़ियल ||
*आडम्बर, ढोंग

अपनापन नहिं आपसे, अपने से अपड़ाव |
आप आप की है पड़ी, जाने कहाँ जुड़ाव |

जाने कहाँ जुड़ाव, समर्थन जिनका पाया |
दिखा उन्हीं को दाँव, नहीं सरकार बनाया |

रविकर सपना टूट, शुरू है सतत कलपना |
लगे स्वार्थी आप, तोड़ते वायदा अपना ||

Untitled

ZEAL 
 ZEAL
 पूर तमन्ना हो गई, जीते आप चुनाव |
पर अट्ठाइस सीट से, होता नहीं अघाव |

होता नहीं अघाव, दाँव लम्बा मारेगा |
होगा पुन: चुनाव, आप सब को तारेगा |

आये सत्तर सीट, जुड़ेगा स्वर्णिम पन्ना |
सारी दुनिया साफ़, तभी हो पूर तमन्ना ||

करें इशारा आप, बैठ रेडी मधु-कोड़ा


कोड़ा की दरकार थी, दे कोड़ा फटकार |
आये सब औकात में, झाड़ू का आभार |

झाड़ू का आभार, कमल नैनों में गरदा |
पंजे की दरकार, हटा दे पीला परदा |

नहीं बने सरकार, भानुमति कुनबा जोड़ा |
करें इशारा आप, बैठ रेडी मधु-कोड़ा ||   


Tuesday, 10 December 2013

नकारात्मक गुण छिपा, ले ईमान की आड़ -

  

बावन पत्ते कुछ इधर कुछ उधर हंस रहा है बस एक जोकर

सुशील कुमार जोशी 

पंजे घी में लो डुबा, छक्के-अट्ठे साथ |
छोड़ें रविकर बादशा, जब बेगम का हाथ |

जब बेगम का हाथ, गुलामों ख़्वाब सजाओ |
सैकिल इक्का साज, दुक्कियाँ सैर कराओ |

खुश हैं हाथी-दांत, लगाते चौका गंजे |
सत्ता दे दहलाय, डुबा नहला के पंजे ||  
आपेक्षा अब आप, करो दिल्ली की पूरी-
  
नकारात्मक गुण छिपा, ले ईमान की आड़ । 
व्यवहारिकता की कमी, दुविधा रही बिगाड़ । 

दुविधा रही बिगाड़,  तर्क-अभिव्यक्ति जरुरी । 
आपेक्षा अब आप, करो दिल्ली की पूरी । 

पानी बिजली सहित, प्रशासन स्वच्छ सकारा । 
वायदे करिये पूर, अन्यथा कहूं नकारा ॥  
लेना देना साथ भी, लागे भ्रष्टाचार-
अड़ियल टट्टू आपका, अड़ा-खड़ा मझधार |
लेना देना साथ भी, लागे भ्रष्टाचार |

लागे भ्रष्टाचार, दीखने लगा *अड़ाड़ा |
भाड़ा पूरा पाय, पढ़ाये आज पहाड़ा |

ताके पूरा देश, हमेशा बेहतर दढ़ियल |
टस से मस ना होय, महत्वाकांक्षी अड़ियल ||
*आडम्बर, ढोंग

अपनापन नहिं आपसे, अपने से अपड़ाव |
आप आप की है पड़ी, जाने कहाँ जुड़ाव |

जाने कहाँ जुड़ाव, समर्थन जिनका पाया |
दिखा उन्हीं को दाँव, नहीं सरकार बनाया |

रविकर सपना टूट, शुरू है सतत कलपना |
लगे स्वार्थी आप, तोड़ते वायदा अपना ||

Untitled

ZEAL 
 ZEAL
 पूर तमन्ना हो गई, जीते आप चुनाव |
पर अट्ठाइस सीट से, होता नहीं अघाव |

होता नहीं अघाव, दाँव लम्बा मारेगा |
होगा पुन: चुनाव, आप सब को तारेगा |

आये सत्तर सीट, जुड़ेगा स्वर्णिम पन्ना |
सारी दुनिया साफ़, तभी हो पूर तमन्ना ||

करें इशारा आप, बैठ रेडी मधु-कोड़ा


कोड़ा की दरकार थी, दे कोड़ा फटकार |
आये सब औकात में, झाड़ू का आभार |

झाड़ू का आभार, कमल नैनों में गरदा |
पंजे की दरकार, हटा दे पीला परदा |

नहीं बने सरकार, भानुमति कुनबा जोड़ा |
करें इशारा आप, बैठ रेडी मधु-कोड़ा ||   






Monday, 9 December 2013

लोकसभा में आप की, मानो सीट पचास -

 आपका ब्लॉग

कमल से नहीं झाड़ू से पिटे हैं हम


पूर तमन्ना हो गई, जीते आप चुनाव |
पर अट्ठाइस सीट से, होता नहीं अघाव |

होता नहीं अघाव, दाँव लम्बा मारेगा |
होगा पुन: चुनाव, आप सब को तारेगा |

आये सत्तर सीट, जुड़ेगा स्वर्णिम पन्ना |
सारी दुनिया साफ़, तभी हो पूर तमन्ना ||




चुल्लू में उल्लू बने, धन्य समर्थक आप -

चुल्लू में उल्लू बने, धन्य समर्थक आप |
कीचड़ में खिलते कमल, चालू क्रिया-कलाप |

चालू क्रिया-कलाप, संभालो कुनबा अपना |
माना उनसे बीस, किन्तु है अभी निबटना |

साम-दाम मद लोभ, बदल ना जाँय निठल्लू |
होय खरीद-फरोख्त, मँगा पानी इक चुल्लू ||

चुल्लू में उल्लू बनना= थोड़ी सी भाँग पीकर बेसुध हो जाना-

तेरह दिन की लो बना, एक वोट से हार-

तेरह दिन की लो बना, एक वोट से हार |
दुहराये इतिहास को, पाये पुन: अपार |

पाये पुन: अपार, कमल को पाला मारे |
ताल तलैया सूख, नर्मदा आती द्वारे |

बच जाते बत्तीस, पार्टी आगे जिनकी |
वह ही जिम्मेदार, बना लो तेरह दिन की ||




सबको माने चोर, समर्थन ले ना दे ना -

कुंडलियां 

लेना देना जब नहीं, करे तंत्र को बांस |
लोकसभा में आप की, मानो सीट पचास |

मानो सीट पचास,  इलेक्शन होय दुबारे |
करके अरबों नाश, आम पब्लिक को मारे |

अड़ियल टट्टू आप, अकेले नैया खेना |
सबको माने चोर, समर्थन ले ना दे ना ||

पर अट्ठाइस सीट से, होता नहीं अघाव-


Untitled

ZEAL 
 ZEAL
 पूर तमन्ना हो गई, जीते आप चुनाव |
पर अट्ठाइस सीट से, होता नहीं अघाव |

होता नहीं अघाव, दाँव लम्बा मारेगा |
होगा पुन: चुनाव, आप सब को तारेगा |

आये सत्तर सीट, जुड़ेगा स्वर्णिम पन्ना |
सारी दुनिया साफ़, तभी हो पूर तमन्ना ||


अन्ना को अफ़सोस है, झाड़ू रहा अपूर्ण-

अन्ना को अफ़सोस है, झाड़ू रहा अपूर्ण |
कृत्य उन्हीं का है सखे, मनसा करते चूर्ण |

मनसा करते चूर्ण , नहीं तो बहुमत आता |
प्यारा केजरिवाल, सही सरकार बनाता |

दिल्लीवासी झूल, रहो लेकिन चौकन्ना |
दुहराना मत भूल, त्रिशंकु करते जो अन्ना ||




काजी तो सठिया गया, कहे उच्चतम सृंग-

अपने बस में अब नहीं, पा'जी गंगू भृंग |

 पा'जी गंगू भृंग, कुसुम कलिकाएँ चूसा |
ना आशा ना तेज, नहीं तो भरता भूसा |

रविकर है निरुपाय, अगर दोनों है राजी |
कलिका सुने पुकार, पुकारे जब भी काजी |


Friday, 6 December 2013

वह सोलह की रात, आज भी अक्सर कौंधे-


  Actor Sanjay Dutt gets 30-day parole reason wife unwell but is she unwell

SM 

 संजय की मान्यता पर, दुनिया करे बवाल  |
देखो अब धृतराष्ट्र का, आँखों देखा हाल |

आँखों देखा हाल, जब्त ए के सैतालिस |
सैतालिस से राष्ट्र,  कर रहा मक्खन-पॉलिश |

सैंया भे कुतवाल, बात फिर कैसे भय की |
किये बाप ने पुण्य, जमानत हो संजय की | 


रविकर करो सफ़ेद, कलेजा अपना काला-

पाला पड़ता इस कदर, पौधा दिया गलाय |
उनके पाले जो पड़े,  *पालागन कर जाय |
*पैर लगना, नमस्कार करना 

*पालागन कर जाय, अन्यथा बच ना पाये |
जाय चांदनी जीत, धूप को मौसम खाये | 

रविकर करो सफ़ेद, कलेजा अपना काला |
मकु होवे नरमेध, सोच गर कुत्सित पाला ||


काजी तो सठिया गया, कहे उच्चतम सृंग-

अपने बस में अब नहीं, पा'जी गंगू भृंग |

 पा'जी गंगू भृंग, कुसुम कलिकाएँ चूसा |
ना आशा ना तेज, नहीं तो भरता भूसा |

रविकर है निरुपाय, अगर दोनों है राजी |
कलिका सुने पुकार, पुकारे जब भी काजी |


१६ दिसम्‍बर क्रान्ति

Vikesh Badola 

कौंधे तीखे प्रश्न क्यूँ, क्यूँ कहते हो व्यर्थ |
जीवन के अपने रहे, सदा रहेंगे अर्थ |

सदा रहेंगे अर्थ, रहेगी मनुज मान्यता |
बने अन्यथा देव, यही है मित्र सत्यता |

सदाचार है शेष, अन्यथा गिरते औन्धे |
वह सोलह की रात, आज भी अक्सर कौंधे ||


व्यर्थ रेप कानून, कहे इत खुल्लम खुल्ला-

महिलाओं से इतना डर क्यों

 फारुख अब्दुल्ला साहब अपना दुःख बयां कर रहे हैं, 
कि महिलाओं से इतना डर लगने लगा है कि 
उन्हें पीए बनाने से पहले भी सोचें ...
शब्द-शिखर पर Akanksha Yadav 

अब्दुल्ला दीवानगी, देख बानगी एक |
करे खिलाफत किन्तु फिर, देता माथा टेक |

देता माथा टेक, नेक बन्दा है वैसे |
किन्तु तरुण घबराय, लिफ्ट की लिप्सा जैसे |

व्यर्थ रेप कानून, कहे इत खुल्लम खुल्ला |
उसका राज्य विशेष, जानता उत अब्दुल्ला ||




एक और गाँधी 'मंडेला' का जाना

Krishna Kumar Yadav 






डेला गोरों के बंधा, बड़ा मरकहा जीव । 
कालों को मारा किया, दुःख दुर्दशा अतीव । 

दुःख दुर्दशा अतीव, नींव के अनगढ़ पत्थर ।
चोट खाय वे मनुज, बैठ जाते थे थककर ।

दिला दिया सम्मान, हिलाया देश अकेला । 
आया गाँधी एक, जियो नेल्सन मंडेला ॥