Friday, 18 April 2014

रविकर पीठासीन, देह में मची खलबली-

बोकारो में बम फटे, लोकतंत्र पर घाव |
गिरीडीह में पर हुवे, अच्छे भले चुनाव |

अच्छे भले चुनाव, करें उत्पात नक्सली |
रविकर पीठासीन, देह में मची खलबली |

साठ फीसदी पोल, शक्ति मतदाता झोंका |
खा बैलट के बुलट, मरेगा नक्सल-बोका ||

Thursday, 20 March 2014

जाति-धर्म पर वोट, बुद्धि-बल हवा-हवाई

हवा हवाई योजना, हवा हवाई बात |
भूला सारी मुश्किलें, यह मानुष बदजात |

यह मानुष बदजात, चुनावी बेला आई |
भूला भ्रष्टाचार, भूल बैठा मँहगाई |

हुआ नशे में चूर, कुँआ देखे ना खाईं | 
जाति-धर्म पर वोट, बुद्धि-बल हवा-हवाई ||

Thursday, 13 March 2014

झाड़ू झूमे अर्श पर, पंजे में लहराय-

होली की शुभकामनायें- रविकर प्रवास पर 
झाड़ू झूमे अर्श पर, पंजे में लहराय |
लेकिन कूड़ा फर्श पर, कैसे बाहर जाय-

कैसे बाहर जाय, डाल दे पानी इसपर |
पड़ा पड़ा सड़ जाय, होय कीचड़ सा सड़कर |

कीचड़ में फिर कमल, कमल लक्ष्मी पग चूमे |
पवन चले उनचास, मास दो झाड़ू झूमे ||

Tuesday, 4 March 2014

करे 'करेला' रैलियां, दूर करे मधु'मेह

करे 'करेला' रैलियां, दूर करे मधु'मेह |
 देख-दाख मत खा'मियाँ, चढ़े हरेरी देह |

चढ़े हरेरी देह, चीख मत चीकू केला | 
छोड़ो आलू 'आम', 'हाथ' का छोड़ झमेला |

जिमीकंद, अंगूर, शरीफा, मीठा अखरे |
बनो करेला भक्त, छोड़ के मुर्गी-बकरे ||

Tuesday, 25 February 2014

लेकिन गिद्ध समाज, बाज को गलत बताये -


भैया भ्रष्टाचार भी, भद्रकार भरपूर |
वाँछित करे विकास यह, मुँह में मियाँ मसूर |

मुँह में मियाँ मसूर, कर्मरत कई आलसी |
 देश-काल गतिमान, बदलना नहीं पॉलिसी |

रविकर भकुआ एक, "आप" की लेत बलैया |
रहा जमाना देख, दाग भी अच्छे भैया ॥  


राहुल की रैली मे आओ 300 रुपये पाओ ( वीडियो सबूत )

SACCHAI 
मज़बूरी मजदूर की, भैया पहले जान |
राहुल बाबा से रही, है पहचान पुरान |

है पहचान पुरान, फीस तो नहीं लगाए |
देना पड़ता पॉंच, यहाँ पर किन्तु कमाए |

दिनभर की जो आय, आय के देते पूरी |
जय जय राहुल राज, राज रखना मजबूरी ||

दे *दिल्ले में आग, बिगाड़े आप रतालू -


तालू से लगती नहीं, जिभ्या क्यूँ महराज |
हरदिन पलटी मारते,  झूँठों के सरताज  |

झूँठों के सरताज, रहे सर ताज सजाये |
एकमात्र  ईमान, किन्तु दुर्गुण सब आये |

मिर्च-मसाला झोंक, पकाई सब्जी चालू ।
दे *दिल्ले में आग, बिगाड़े आप रतालू ॥

*किवाड़ के पीछे लगा  लकड़ी का चौकोर खूँटा 

दिल्ली को तहरीर चौक बनाना चाहता था - केजरीवाल की साजिश ( वीडियो )

SACCHAI 



अंतर-तह तहरीर है, चौक-चाक में आग-


अंतर-तह तहरीर है, चौक-चाक में आग |
रविकर सर पर पैर रख, भाग सके तो भाग |

भाग सके तो भाग, जमुन-जल नाग-कालिया |
लिया दिया ना बाल, बटोरे किन्तु तालियां |

दिखे अराजक घोर, काहिरा जैसा जंतर |
होवे ढोर बटोर, आप में कैसा अंतर ||   
चिड़ियाघर कायल हुआ, बदल गया अंदाज । 
मोदनीय वातावरण, बाजीगर सर-ताज । 

बाजीगर सर-ताज, बाज गलती से आये । 
लेकिन गिद्ध समाज, बाज को गलत बताये । 

कौआ इक चालाक, बाँट-ईमानी पुड़िया । 
मिस-मैनेज कर काम, रोज भड़काए चिड़िया ॥ 

आया पर आया सतत, नेह बिना सन्देह||
पाले बच्चा गैर का, रही दिखती नेह |
रही दिखती नेह, छोड़ने शाला जाए |
अपना बच्चा गेह, वहाँ चाहे चिल्लाये |
मलकिन करती मौज, मातु बन नाम कमाया |
लेती समय खरीद, समझ में रविकर आया ||


Sunday, 23 February 2014

रे मौसेरे चोर, प्रलापी अबतो चुपकर-

केजरीवाल की खुजली और गैस के दाम

ZEAL 
 ZEAL 





 बानी केजरि वाल की, प्रश्न रही है दाग |
नमो न मो दी गैस नूँ , आग लगा के भाग |

आग लगा के भाग, भाग सरकार छोड़ के |
गुणा-भाग में लाग, नियम कानून तोड़ के |

है सांसत में जान, बिगड़ती राम-कहानी |
खाँसी से नादान, भगाएगा अम्बानी ||

राहुल की रेली मे आओ 300 रुपये पाओ ( वीडियो सबूत )

SACCHAI 
मज़बूरी मजदूर की, भैया पहले जान |
राहुल बाबा से रही, है पहचान पुरान |

पहचान पुरान, फीस तो नहीं लगाए |
देना पड़ता पॉंच, यहाँ पर किन्तु कमाए |

दिनभर की जो आय, आय के देते पूरी |
जय जय राहुल राज, राज रखना मजबूरी ||

साही की शह-मात से, है'रानी में भेड़ |
खों खों खों भालू करे, दे गीदड़ भी छेड़ |

दे गीदड़ भी छेड़, ताकती ती'जी ताकत |
हाथी बन्दर ऊंट, करे हरबार हिमाकत |

अब निरीह मिमियान, नहीं इस बार कराही |
की काँटों से प्यार, सवारी देखे साही ||

दिल्ली को तहरीर चौक बनाना चाहता था - केजरीवाल की साजिश ( वीडियो )

SACCHAI 







 पाना-वाना कुछ नहीं, फिर भी करें प्रचार |
ताना-बाना टूटता, जनता करे पुकार |

जनता करे पुकार, गरीबी उन्हें मिटाये  |
राजनीति की मार, बगावत को उकसाए |

आये थे जो आप, मिला था एक बहाना |
किन्तु भगोड़ा भाग, नहीं अब माथ खपाना ||

पोल खोलते पोपले, सन चौदह के पोल |
किन्तु ढोल में पोल है, कौन सकेगा खोल |

कौन सकेगा खोल, खोल में बैठे छुपकर |
रे मौसेरे चोर, प्रलापी अबतो चुपकर |

कर्महीन-ई-मान, फटाफट रस्ता नापो |
नहीं काम पर ध्यान, व्यर्थ में कागज़ छापो || 


Friday, 21 February 2014

चरावरी रविकर करे, हरदिन व्यर्थ प्रलाप -


कौआ लाय सुराज, सफल कोयल मन्सूबे-

कौआ कोयल बाज में, होड़ मची है आज |
कोयल के अंडे पले, कौआ लाय सुराज |  

कौआ लाय सुराज, सफल कोयल मन्सूबे |
हर सूबे में खेल, घोसला साला डूबे |

बाज आय नहिं बाज, आज भी इसका हौवा |
बहुमत कैसे पाय, उधर कौआता कौआ ||  

दिल्ली दिखी अवाक, आप मस्ती में झूमे-

खरी खरी कह हर घरी, खूब जमाया धाक |
अपना मतलब गाँठ के, किया कलेजा चाक |

किया कलेजा चाक, देश भर में अब घूमे |
दिल्ली दिखी अवाक, आप मस्ती में झूमे |

डाल गए मझधार, धोय साबुन से कथरी |
मत मतलब मतवार, महज कर रहे मसखरी ||  
पोल खोलते पोपले, सन चौदह के पोल |
किन्तु ढोल में पोल है, कौन सकेगा खोल |
कौन सकेगा खोल, खोल में बैठे छुपकर |
रे मौसेरे चोर, प्रलापी अबतो चुपकर |
कर्महीन-ई-मान, फटाफट रस्ता नापो |
नहीं काम पर ध्यान, व्यर्थ में कागज़ छापो ||

हमारे महानगरों में कूड़ा कचरा एक भयावह समस्या …

Suman 








चरावरी रविकर करे, हरदिन व्यर्थ प्रलाप |
कवि खातिर वरदान ही, पाठक खातिर शाप |

पाठक खातिर शाप, कीजिये खातिरदारी |
कूड़ा-कचरा साफ़, नहीं फैले बीमारी |

लेकिन कई कमाँय, मात्र है एक आसरा |
पाएं नियमित आय, फेंकते हम जो कचरा-

ताकें दर्शक मूर्ख, हारते रविकर बाजी-
दखलंदाजी खेल में, करती खेल-खराब |
खले खिलाड़ी कोच को, लेकिन नहीं जवाब |

लेकिन नहीं जवाब, प्रशासक नेता हॉबी |
हॉबी सट्टेबाज, पूँछ कुत्तों की दाबी |

ताकें दर्शक मूर्ख, हारते रविकर बाजी |
बड़ी व्यस्त सरकार, करे क्यूँ दखलंदाजी --


लूलू लूला लचर लॉ, रहा लबलबा प्रांत

तिल तिल कर कातिल मरे, बचे नहीं दुर्दांत | 
लूलू लूला लचर लॉ, रहा लबलबा प्रांत |

रहा लबलबा प्रांत, हमारे मारे पी एम् |
वोट बैंक पॉलिटिक्स, करे जय ललिता सी एम् |

ढोल-ढोल में पोल, हँसे आतंकी खिल खिल |
देख पोल आसन्न, हुवे खुश तीनों कातिल ||,