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Monday, 26 September 2011

यार के झूठे दावे--

दावे   पुख्ता   यार   के,  वादे   तोड़े   खूब |
यादें  हमको  तोडती,   वादे   को   महबूब |

वादे  को  महबूब, नजर  में  भरी  हिकारत |
यादों   में   हम   डूब, चीखते  रहे  पुकारत |

जब रविकर भरमाय,  तड़पकर उसे बुलावे |
करे  क़त्ल  सौ  बार,  यार  के  झूठे   दावे |

10 comments:

  1. कसमे वादे सब बेवफा हैं......

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  2. यार के झूठे दावे--
    दावे पुख्ता यार के, वादे तोड़े खूब |
    यादें हमको तोडती, वादे को महबूब |
    शिद्दत से प्रेम करने का हासिल भी यही है .प्रेम अवदान चाहता भी नहीं है प्रेम बस होता है .

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  3. वादा किया ही जाता है तोडने के लिए ... अच्छी प्रस्तुति

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  4. बहुत सुन्दर...बधाई, आप लिखते रहिए हम पढ़ते रहेंगे ये मेरा वादा है

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  5. बहुत बढ़िया ..

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  6. rarely we find a trustworthy person.

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  7. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल बुधवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  8. आपको सपरिवार
    नवरात्रि पर्व की बधाई और शुभकामनाएं-मंगलकामनाएं !

    -राजेन्द्र स्वर्णकार

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  9. दावे पुख्ता यार के, वादे तोड़े खूब |
    यादें हमको तोडती, वादे को महबूब |

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  10. बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

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