मुलाक़ात कर लूँ
बड़ी बेतुकी बात है, प्रियवर कवि-यशवंत ।
क़दमों के पाए निशाँ , क्यूँ चूके श्रीमंत ।
क्यूँ चूके श्रीमंत, बढ़ो चिन्हों पर आगे ।
कर जीवन-पर्यंत, भाग्य उद्यम से जागे ।
रविकर सच्ची रूह, ढूंढता हरदम जिसको ।
मुलाक़ात कर जाय, पकड़ ले जल्दी उसको ।।
ढर्रा बहुत खराब यह, सोच चढ़े परवान ।
छोटी मोटी चोरियां, करें नहीं कल्याण ।
करें नहीं कल्याण, हाथ लंबा कुछ मारो ।
कालेज में कलेज, व्यर्थ ही भैया जारो ।
मिला नहीं प्रोजेक्ट, कलेजा कर के कर्रा ।
लेक्चर का अभ्यास, पकड़ बाबा का ढर्रा ।










