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Monday, 4 July 2011

जिंदगी तो योजनाओं से परे है |

जिन्दगी में योजनायें क्या बनाये 
जिंदगी तो योजनाओं से परे है |
कौन-कब-कैसे-कहाँ-क्योंकर मिला,
प्रश्न ही यह कल्पनाओं से परे है ||
हम-हमी-हममे हमारा वक्त सारा 
जिंदगी इन भावनाओं से परे है |
है नहीं कोई नियंत्रण आत्मा -
विज्ञान की अवधारणाओ से परे है ||
हो पास तो एहसास  होते खुशनुमा
पाक है जो वासनाओ से परे है |
करणीय  था, या निषेधक वाकया
जिंदगी तो वर्जनाओ से परे है ||
वक्त का तूफान हो या जलजला
मित्रता संभावनाओं से परे है |
जिन्दगी में योजनायें क्या बनाये
                      जिंदगी तो योजनाओं से परे है ||

13 comments:

  1. बहुत बढ़िया गीतिका रची है आपने!
    गुनहुनाने में मज़ा आ रहा है!

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  2. वक्त का तूफान हो या जलजला
    मित्रता संभावनाओं से परे है |
    जिन्दगी में योजनायें क्या बनाये
    जिंदगी तो योजनाओं से परे है |
    सच है जिंदगी में इन्सान की बनाई योजनायें नहीं चलती.

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  3. वक्त का तूफान हो या जलजला
    मित्रता संभावनाओं से परे है ।

    बहुत अच्छी कविता।
    पसंद आई।

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  4. रविकर जी अभिवादन -सुन्दर पंक्तियाँ -लाजबाब -बधाई हो
    हम-हमी-हममे हमारा वक्त सारा
    जिंदगी इन भावनाओं से परे है |
    है नहीं कोई नियंत्रण आत्मा -
    विज्ञान की अवधारणाओ से परे है ||
    शुक्ल भ्रमर ५

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  5. जिंदगी तो योजनाओं से परे है |
    meaningful poem

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  6. 'जिंदगी तो योजनाओं से परे है'

    वाकई सच कहा भाया!

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  7. ज़िन्दगी तो वर्जनाओं से परे है ,
    नाम अपना वर्ज्य नारी क्यों धरे है .

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  8. शब्द और भाव संयोजन अद्भुत है आपकी रचना का...बधाई स्वीकारें

    नीरज

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  9. जिन्दगी में योजनायें क्या बनाये
    जिंदगी तो योजनाओं से परे है |
    सुन्दर रचना .

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  10. वक्त का तूफान हो या जलजला
    मित्रता संभावनाओं से परे है |
    जिन्दगी में योजनायें क्या बनाये
    जिंदगी तो योजनाओं से परे है ||
    बहुत ही बढि़या लिखा है आपने ।

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  11. क्या बात. बहुत सुंदर

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  12. सुन्दर रचना बधाई

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