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Tuesday, 12 July 2011

12 जुलाई को कटा 25 वाँ मुर्गा

जश्न  मनाती  जा रहीं,  बेगम  मस्त  महान,
अंगड़ाई   ले   छेड़  दीं,    वही   पुरानी  तान |

वही    पुरानी  तान,   सुबह  से रौनक  भारी-
करके फिर  ऐलान,   करीं  जम   के  तैयारी |

 है  रविकर अफ़सोस,  कभी  न  मुर्गा  लाती,
"पर" काटी  पच्चीस, जीत का जश्न मनाती ||

पर काटी  /  पर  काटना ||
वैसे तो हमारे यहाँ बकरे की कन-कट्टी भी की जाती है, सांकेतिक बलि ||
 
                       

16 comments:

  1. हाँ भाई !
    आज "हमारे" सफ़र के २५ वर्ष पूरे हुए ||

    एक खास बात और
    आज के ही दिन गत वर्ष
    मेरे सुपुत्र कुमार शिवा ने
    MNNIT, Allahabad से
    B Tech कर
    TCIL, New Delhi ज्वाइन किया ||

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  2. २५वीं वर्षगांठ तो नहीं ... बता रहे हैं।
    बधाई। शुभकामनाएं।
    अब इतने छायावादी ढंग से लिखिएगा तो समझना मुश्किल लगता है।

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  3. बहुत बढ़िया सटायर लिखा है आपने कुण्डलिया छन्द में!

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  4. कविताई समेत जीवन की तमाम सौगातों उपलब्धियों के लिए बधाई .बेटे को भी आशीष .

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  5. २५वीं वर्षगांठ की बधाई तथा हार्दिक शुभकामनाएं।

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  6. बहुत सुन्दर पक्तिँयाँ

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  7. बहुत ही बढ़िया और ज़बरदस्त व्यंग्य रहा! शानदार प्रस्तुती!
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

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  8. शानदार व्यंग्य

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  9. है रविकर अफ़सोस, कभी न मुर्गा लाती,
    "पर" काटी पच्चीस, जीत का जश्न मनाती ||

    प्रिय रविकर जी हार्दिक अभिवादन -इस पचीसवीं के चक्कर में बहुत दिमाग दौड़ना पड़ा अगर आप की मैडम के विषय में है तो कटने दीजिये मुर्गा ..वो तो बना ही है इसी लिए ख़ुशी देने के लिए ...जश्ने शाम मुबारका --हार्दिक शुभ कामनाएं -

    अगर ये राज-नीति से सम्बंधित है कुछ तो फिर तो बहुत कुछ लिखना था ...वो मैडम कितनों के पर ..आगे भी खचाखच ....
    भ्रमर ५

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  10. अगर ये राज-नीति से सम्बंधित है कुछ तो फिर तो बहुत कुछ लिखना था ...वो मैडम कितनों के पर ..आगे भी खचाखच ....

    वाह नया अर्थ ||
    मजेदार ||

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  11. बेगम साहिबा की जीत का जश्न मुबारक आपको .....
    अब ये राज़ खोल ही दें ....!!

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  12. क़ुबूल हरिकिरत जी ||
    सही फरमाया आप ने |
    खूब परिश्रम किया है श्रीमती जी ने तभी आज बच्चे अच्छे इंसान और अच्छे एक्जीक्यूटिव बन पाए ||
    घर में मुझे मिला कर ४ बच्चे हैं |
    और आप तो जानती ही हैं की सामने रहने वाले की खैर नहीं |
    पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ था तो सिखा था की साहब की अगाडी से और घोड़े की पछाड़ी से बचकर रहना चाहिए पर कहाँ -----

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  13. यह वाला अधिक अच्छा लगा।

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  14. मैडम को उनकी मेहनत और सुकर्म पर ढेर सारी बधाइयाँ
    ....खूब परिश्रम किया है श्रीमती जी ने तभी आज बच्चे अच्छे इंसान और अच्छे एक्जीक्यूटिव बन पाए ||
    घर में मुझे मिला कर ४ बच्चे हैं |
    हमारे प्रिय इस बड़े बच्चे को भी बहुत अच्छे से सम्हाली जो आज हम सब के काम ....
    भ्रमर ५

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