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Wednesday, 11 July 2012

राशन कैसे आय, बताओ फिर सत्तरह में ??

बदबू आती है ऐसे नेताओं से ...

महेन्द्र श्रीवास्तव
आधा सच...  

आइस मिलती फ्री में, चिदंबरम को रोज ।
व्हिस्की का पैसा लगे, दो हजार का भोज । 
दो हजार का भोज, गरीबी वो क्या जानें ।
आइसक्रीम का रेट, प्रेस में खूब बखाने ।
पानी बोतल अगर, गरीबी ले पंद्रह में ।
राशन कैसे आय, बताओ फिर सत्तरह में ??

राजनीति,तेरे रूप अनेक,...


यह तो ऐसा ही सखे, मगर मच्छ से बैर |
मानसून में बच गई, मछली की कुल खैर |
मछली की कुल खैर, सैर पर वह भागेगी |
नदी नदी हो पार, समंदर तक लांघेगी |
ऐसा अंतर्जाल, मगर भी फंस जायेगा |
राजनीति जंजाल, नहीं वह खा पायेगा ||
रचनाओं को दुह गए, दोहे बेहद खास |
बरस झमाझम है रहा, यह सावन शिव मास |
यह सावन शिव मास, कृपा गुरुवर की होती |
हुई स्नेहसिक्त आज, जलाया पावन ज्योति |
बहुत बहुत आभार, कृपा कुछ और बढाओ |
धन्य हो गई आज , गीत गाओ  रचनाओं ||

उनका जन्मदिन,मेरा उपहार !

संतोष त्रिवेदी at बैसवारी baiswari  

हार गले में डाल के, इंतजार सप्ताह |
अब पहुंचे उपहार ले, कौन कहेगा वाह |
कौन कहेगा वाह, आह तो निकलेगी ही |
नहीं बची कुछ राह, "बहनिया" उखड़ेगी ही |
छोड़ेगी इक माह, डलेगा नमक जले में |
ठीक समय उपहार, समय से हार गले में ||
संतोष जी ने फोन कर बताया कि
 सही समय पर ही गिफ्ट कर दिया था |




  1. तनिक देर से ही सही, दीदी करो कुबूल |
    मेरी मंगल-कामना, एक टोकरी फूल |
    एक टोकरी फूल, सदा गुलदस्ता महके |
    तितली भ्रमर पतंग, चिरैया चीं चीं चहके |
    घर आँगन में ख़ुशी, रहे सब मंगल मंगल |
    स्वास्थ्य रहे अनुकूल , मिले ईश्वर का संबल ||

  2. चालाकी संतोष की, करिए पर संतोष |
    इतना मंहगा कैमरा, पर इनका न दोष |
    पर इनका न दोष, इन्हें इतना मालुम है |
    करेंगे ये ही यूज, बहन होती गुम-सुम है |
    भैया की यह बात, गाँठ में बांधो बहना |
    फोटोग्राफी सीख़, कैमरा खुद ही रखना ||

    दोनों वक़्त का चाँद

    यशवन्त माथुर   जो मेरा मन कहे  
फिकरे बजी की फिकर, नहीं करे यशवंत |
किस सर का सर है सखे, कौन चाँद श्रीमंत ||


कितने नैचुरल ये अननैचुरल रिश्ते.

shikha varshney at स्पंदन SPANDAN
कन्फ्यूजन अपने लिए, समलैंगिक सामान्य |
धीरे धीरे ही सही, कई जगह पर मान्य |
कई जगह पर मान्य, एक से दोनों हमदम |
महिलाओं का जोड़, गर्भ-धारण में सक्षम |
कर खुद का एहसास,  करें बच्चे का सृजन |
अगर हुवे दो मर्द, करे क्या है कन्फ्यूजन |
विज्ञान ने यह भी संभव कर दिया है वैसे तो ||

"हाथी के निकलते अगर पर "

सुशील at "उल्लूक टाईम्स "


हाथी के पर निकलते, पर हथिनी हुशियार ।
केश और नाखून सा,   देती उसे संवार ।
देती उसे संवार,  बड़ा हाथी त्रिवेदी ।
ममता कैंची धार, दिखाई झट बलिवेदी ।
दिल्ली का इतिहास, गौर से देखो साथी ।
समय समय पर आय ,  कई कटवाए हाथी ।।

बाबा भोलेनाथ का दर्शन

  (Arvind Mishra) at क्वचिदन्यतोSपि... 

कुर्सी-तोड़ मुलाजिमी, नत मस्तक हो जाय |
श्रद्धा का सैलाब जो, हर हर बम बम गाय  |
हर हर बम बम
गाय , विवेकी तर्क हारता |
अनुशासन में भक्त, पुष्प जल-दुग्ध ढारता |
हठयोगी भी मस्त, हुवे  हैं धूल धूसरित  |
बाबा का आशीष, प्रसन्न हैं चकित थकित ||  

4 comments:

  1. फिकरे बजी की फिकर, नहीं करे यशवंत |
    किस सर का सर है सखे, कौन चाँद श्रीमंत ||
    बहुत खूब कहा है आपने -
    वीरुभाई ,
    Hotel Travelodge ,Traverse City ,Room no .134,Michigun .USA

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  2. हाथी लाया उसे भी कटवा डाला
    हाय रविकर ये तूने क्या कर डाला
    हाथी है भैंस नहीं हुई अच्छा हुवा
    नहीं तो कहना पड़ता पानी में क्यों डाला ।

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    अरे अरे ये क्या दिखाई दे रहा है
    कमैंट भी तोल के लगाया जायेगा
    पता नहीं कितना उसमें से काट खायेगा?

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  4. सुंदर टिप्पणी के लिए आभार ,,,,,,

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