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Sunday, 22 July 2012

ईंधन ले धन लूट, छूट वापस सरकारी-


कछुवा कुछ भी न छुवा, हाथी काटे केक ।
बन्दर केला खाय के, छिलका देता फेंक ।

छिलका देता फेंक, फिसल कर गैंडा गिरता ।
बेहद मोटी खाल, हिरन से जाकर भिड़ता ।

चिड़िया हंसती जाय, देख के नाटक सारा ।
जन्म-दिवस का केक, फेंक के हाथी मारा ।।


मत से है पूरा  प्यार सखे ।
मत करना तुम खिलवाड़ सखे ।
तुम दान करो तन मन धन मत -
ताकि हम सकें दहाड़ सखे ।।
स्वार्थ सिद्ध जब न होवे,
सत्ता को चले उखाड़ सखे ।
निस्वार्थ भाव से कर्म करें जन 
कलुषित दिल मत ताड़ सखे ।।


कबिरा खड़ा बजार में,माँगे सबसे भीख |
मनमोहन को देखकर,लीन्हा चुप्पी सीख ||
ravikar
लीन्हा चुप्पी सीख, चीख भी ना निकलेगी  |
खींचे चाहे खाल,  जुल्म चुपचाप सहेगी |
ईंधन ले धन लूट, छूट वापस सरकारी |
पियूँ खून के घूँट , सहू इनकी मक्कारी ||

"भइया मुझे झुलाएगा" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


झूले झूला मगन मन, यह हरियाली तीज ।
सावन की छाई घटा, अंतस जाए भीज ।

अंतस जाए भीज, नहीं है प्रांजल भूला ।
हरी भरी सी डाल, डाल कर झूला-झूला ।

दादी लेती झूल, झूलती मैया चाची ।
धीरे धीरे खूब, झुलाए प्यारी प्राची ।।

७०० वी पोस्ट - पण्डित चन्द्रशेखर 'आजाद' की १०६ वी जयंती पर विशेष

शिवम् मिश्रा
बुरा भला  

हठी साहसी दृढ़-वचन, स्वाभिमान भरपूर ।
चरितवान निर्भीक मन, देशभक्ति में चूर ।

देशभक्ति में चूर, गुलामी की जंजीरें ।
बिलकुल नहीं कुबूल, उठाते जब शमशीरें ।

काँप उठे अंग्रेज, किन्तु फिर से गद्दारी ।
रहे सदा आजाद, स्वयं को गोली मारी ।।


साम्यवाद के शत्रु ये मार्क्सवादी' ---

विजय राज बली माथुर 

परबाबा खोदें कुआँ,  पीता पानी लाय  ।
झक्की-पन में एक ठो, मोटर दिया लगाय ।

मोटर दिया लगाय,  बड़ा कचडा है लेकिन ।
पानी रहे पिलाय , सभी को इसका हरदिन ।

देश काल माहौल, बदलता है तेजी से ।
करें इसी का पान, नियम से बन्धेजी से ।।

  1.  कृपया मत पढ़ें 

    "लोटा प्रतियोगिता "

    सुशील  
    "उल्लूक टाईम्स "
    लोटा छोटा या बड़ा, लोटा लुढका मस्त |
    अजी अजीरण था हुआ , कै-उबकाई दश्त |
    कै-उबकाई दश्त , पस्त जब तक न होवे-
    लोटा लोटा कष्ट, हमेशा दिनभर ढोवे |
    रविकर छोटी करे, आप की यह उबकाई |
    चार कुंडली जोड़, घटा देगा लम्बाई ||


    जगह जगह पर दिख रहे, बन्दे बड़े अजीब |
    जब देखा जजमान को, जाकर जरा करीब |
    जाकर जरा करीब, जोश में जोशी भैया |
    लम्बी लम्बी फेंक, बटोरें बड़ी बधैया |
    मिलती है इक क्लास, पढ़ाने लगते दिनभर |
    ज्यों कविता बिन सांस, लिए बकता है रविकर ||


    शोहरत के पीछे पड़े, रहे मुहूरत देख |
    कविताई करते रहे, लिखते हैं अब लेख |
    लिखते हैं अब लेख , कभी नेता फंस जाता |
    श्याम सलोनी नार, कभी कुदरत से नाता |
    हरकत सभी अजीब, सातवाँ अचरज लागा |
    फोटू गई छपाय, फंसा था किन्तु अभागा ||


    पाठक मित्रों से-
    मित्रो इनको झेल के, करते हो उपकार |
    कालेज के बच्चे सभी, प्रकट करें आभार |
    प्रकट करें आभार, सार न कभी बताते |
    लम्बी लम्बी हांक, सदा रामायण गाते |
    रविकर करे रिक्वेस्ट, नहीं लम्बे से सनको |
    छोटी मोटी चीज, नहीं भाती श्रीमन को ||


    छोटी करके धर दिया, गिनो चार सौ बीस |
    शब्दों का संग्रह किया, ली पाठक की रीस |
    ली पाठक की रीस, खीस काढ़े अब रविकर |
    करिए पाठक माफ़, फंसू न अब इस चक्कर |
    शब्दों के वे भाव, ढूंढ़ कर अगर पढोगे |
    रस का स्वाद अपूर्व, तभी तो मित्र चखोगे ||





7 comments:

  1. अब तो लोटा नहीं लोटे देने जा रहा हूँ
    घर के सारे लोटे रविकर के घर पहुँचा रहा हूँ ।

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  2. कालेज के बच्चे सभी, प्रकट करें आभार .

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    Replies
    1. जी
      दरअसल सुशील जी जोशी को पढने वाले
      लोग शिकायत करते हैं कि वे बहुत लम्बी कविता लिखते है-
      उनकी एक कविता को छोटी करना था ||

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    2. अपने समझ न आई, प्रतियोगिता लोटा,
      मुबारक हो रविकर जी को,ले जाये लोटा,,,,,,

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  3. ज़ोरदार प्रयास और प्रेम के लिए आभार :-)

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  4. रचना पर टिप्पणी कर, बढ़ जाती है शान
    टिप्पणी पाकर आपकी,मिल जाता है मान,,,,,

    आभार,,,,,,

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  5. मत से है पूरा प्यार सखे ।
    मत करना तुम खिलवाड़ सखे ।
    तुम दान करो तन मन धन मत -
    ताकि हम सकें दहाड़ सखे ।।
    स्वार्थ सिद्ध जब न होवे,
    सत्ता को चले उखाड़ सखे ।
    निस्वार्थ भाव से कर्म करें जन
    कलुषित दिल मत ताड़ सखे ।।
    बढ़िया टिप्पणियाँ की है आपने सम्बद्ध सेतुओं पर . . .कृपया यहाँ भी पधारें -

    ram ram bhai

    सोमवार, 23 जुलाई 2012

    अमरीका नहीं देखा उसने जिसने लास वेगास नहीं देखा

    http://veerubhai1947.blogspot.de/
    तथा यहाँ भी -

    कैसे बचा जाए मधुमेह में नर्व डेमेज से
    http://kabirakhadabazarmein.blogspot.co

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