Follow by Email

Wednesday, 18 September 2013

तब के दंगे और थे, अब के दंगे और-


कर अफसर बर्खास्त, वजीरे आजम आ-जम

आ जम जा कुर्सी पड़ी, सिखा विधर्मी पाठ |
वोट बैंक मजबूत कर, बढ़ा चढ़ा के ठाठ |

बढ़ा चढ़ा के ठाठ, कहीं कातिल छुड़वाए |
*जटा जाय जग माहिं, जुल्म का फल भी पाए |

फिर भी गोटी लाल, लाल का करना क्या गम |
कर अफसर बर्खास्त, वजीरे आजम आ-जम ||
*ठगा जाना / धोखे में आकर हानि उठाना

दंगाई महफूज, मार के निचले-तबके -

 
तब के दंगे और थे, अब के दंगे और |
हुड़दंगी सिरमौर तब, अब नेता सिरमौर |

अब नेता सिरमौर, गौर आ-जम कर करलें |
ये दंगे के दौर, वोट से थैली भर लें |

मरते हैं मर जाँय, कुचल कर बन्दे रब के |
दंगाई महफूज, मार के निचले-तबके ||



बाकी बातें बाद में, सबसे आगे वोट |
करते हमले ओट से, खर्च करोड़ों नोट | 

खर्च करोड़ों नोट, चोट पीड़ा पहुँचाये |
पीते जाते रक्त, माँस अपनों का खायें |

अग्गी करके धूर्त, दिखाते हैं चालाकी |
जाँय अंतत: हार, दिखी "पूरण" बेबाकी ||


रहमत लाशों पर नहीं, रहम तलाशो व्यर्थ -


रहमत लाशों पर नहीं, रहम तलाशो व्यर्थ |
अग्गी करने से बचो, अग्गी करे अनर्थ |

अग्गी करे अनर्थ, अगाड़ी जलती तीली |
जीवन-गाड़ी ख़ाक, आग फिर लाखों लीली |

करता गलती एक, उठाये कुनबा जहमत |
रविकर रोटी सेंक, बाँटता मरहम रहमत ||




झारखंड में भुखमरी, तप्त अग्नि से गर्भ |
कृषक ख़ुदकुशी कर मरे, मरता दिखा विदर्भ |

मरता दिखा विदर्भ, सियासत दंगा यू पी |
सत्ता करती गर्व, लगाए जनता चुप्पी |

होती बन्दरबांट, दीमकें लगीं फंड में |
लेती फाइल चाट, कोयला झारखंड में ||

1 comment: